चमन लाल के लिए आज का दिन किसी ऐतिहासिक तिथि से कम नहीं था। सुबह के साढ़े पांच बज रहे थे, लेकिन चमन की आँखों में नींद का नामो-निशान नहीं था। पिछले तीन सालों की कड़ी मेहनत, सत्तर इंटरव्यू और अनगिनत रिजेक्शन के बाद आख़िरकार उसे ‘ग्लोबल सॉल्यूशंस इंक’ जैसी बड़ी कंपनी में ‘जूनियर एसोसिएट’ की नौकरी मिली थी। चमन ने आईने के सामने खड़े होकर खुद को देखा। उसने गहरे नीले रंग का सूट पहना था, जो उसने खास इसी दिन के लिए सेल में खरीदा था। टाई लाल रंग की थी, जो शायद थोड़ी ज्यादा ही चमकीली थी, लेकिन चमन को लगा कि यह ‘पावर ड्रेसिंग’ का हिस्सा है। उसकी माँ ने दही-चीनी का कटोरा लेकर कमरे में प्रवेश किया। ‘बेटा चमन, ये खा ले, शुभ होता है,’ माँ ने कहा। चमन ने एक चम्मच दही मुंह में डाली और जोश में बोला, ‘माँ, देख लेना, आज चमन का नाम पूरी कंपनी में गूंजेगा।’ उसे क्या पता था कि उसका नाम वाकई गूंजने वाला था, पर किस वजह से, यह उसने सपने में भी नहीं सोचा था।
चमन घर से निकला और बस स्टैंड की ओर भागा। बस में इतनी भीड़ थी कि उसके सूट की क्रीज आधे रास्ते में ही दम तोड़ गई। जब वह ऑफिस पहुंचा, तो पसीने से तर-बतर था। ऑफिस की इमारत कांच की बनी थी और इतनी ऊंची थी कि चमन की गर्दन पीछे की ओर झुक गई। उसने बड़ी शान से अंदर कदम रखा, लेकिन वहां लगे ऑटोमैटिक कांच के दरवाजों ने उसे धोखा दे दिया। चमन को लगा कि दरवाजा खुला है, वह तेजी से अंदर बढ़ा और ‘धड़ाम’ से कांच से टकरा गया। सुरक्षा गार्ड और रिसेप्शनिस्ट ने उसे ऐसे देखा जैसे वह किसी दूसरे ग्रह से आया प्राणी हो। चमन ने मुस्कुराते हुए अपनी टाई ठीक की और कहा, ‘बस चेक कर रहा था कि कांच असली है या नहीं। क्वालिटी बहुत बढ़िया है आपकी।’ रिसेप्शनिस्ट ने दबी हंसी के साथ उसे अंदर जाने का रास्ता दिखाया।
चमन को नौवें फ्लोर पर जाना था। लिफ्ट में उसके साथ एक गंभीर दिखने वाले सज्जन खड़े थे। चमन ने सोचा कि नेटवर्किंग करने का यह सबसे अच्छा मौका है। उसने उन सज्जन की पीठ थपथपाई और बोला, ‘क्यों भाई साहब, आप भी यहाँ नौकरी मांगने आए हैं क्या? घबराना मत, कॉन्फिडेंस रखना। वैसे मेरा तो पहला दिन है, पर मुझे लगता है यहाँ का माहौल थोड़ा ठंडा है।’ उन सज्जन ने चमन को ऊपर से नीचे तक देखा और बस मुस्कुरा कर रह गए। चमन ने अपनी रौब झाड़ना जारी रखा, ‘देखिये, इस कंपनी को अब मेरे जैसे टैलेंट की जरूरत है। ये जो पुराने खूसट लोग बैठे होंगे ऊपर, उन्हें मैं काम करने का असली तरीका सिखाऊंगा।’ लिफ्ट रुकी और वे सज्जन बाहर निकल गए। चमन भी सीना तानकर बाहर निकला।
एचआर मैनेजर, श्रीमती बत्रा ने चमन का स्वागत किया। उन्होंने उसे उसकी डेस्क दिखाई और कहा, ‘चमन, आज तुम्हारा पहला दिन है, इसलिए हम ज्यादा काम नहीं देंगे। बस ये फाइलें लो और इन्हें स्कैन करके सर्वर पर डाल दो। और हाँ, दोपहर में बोर्ड मीटिंग है, वहां तुम्हें पानी और फाइलों का ध्यान रखना होगा।’ चमन ने सोचा, ‘ये तो बाएं हाथ का खेल है।’ उसने फाइलों का ढेर उठाया और स्कैनर की ओर बढ़ा। वहां एक आधुनिक ‘स्मार्ट स्कैनर’ लगा था। चमन ने बटन दबाने शुरू किए। अचानक मशीन से अजीब सी आवाजें आने लगीं। चमन ने डरकर एक साथ चार-पांच बटन दबा दिए। मशीन ने फाइलें अंदर खींचीं और दूसरी तरफ से उनके छोटे-छोटे टुकड़े करके बाहर फेंकने लगी। चमन की आंखें फटी की फटी रह गईं। वह ‘पेपर शेडर’ था, स्कैनर नहीं! चमन ने जल्दी-जल्दी उन टुकड़ों को समेटने की कोशिश की और उन्हें अपनी दराज में छुपा दिया। उसने मन ही मन सोचा, ‘कोई बात नहीं, डिजिटल इंडिया का जमाना है, किसी को पुरानी फाइलों की क्या जरूरत।’
अब समय था कॉफी ब्रेक का। चमन ऑफिस की हाई-टेक कॉफी मशीन के पास गया। वहां लिखा था ‘टच टू स्टार्ट’। चमन ने जैसे ही टच किया, मशीन ने उससे विकल्प मांगे – एस्प्रेसो, लाते, कैपुचिनो। चमन को लगा ये सब विदेशी नाम उसे नीचा दिखाने के लिए हैं। उसने ‘डबल शॉट एस्प्रेसो’ पर क्लिक किया। मशीन से गरम कॉफी निकलने लगी, लेकिन चमन ने कप रखना भूल गया था। कॉफी सीधे उसके सफेद शर्ट पर गिरी। चमन चिल्लाया, ‘अरे बाप रे! ये मशीन तो हमला कर रही है!’ उसने पास रखा एक तौलिया उठाया और अपनी शर्ट रगड़ने लगा। उसे नहीं पता था कि वह तौलिया दरअसल किसी कर्मचारी का लंच बॉक्स कवर था, जिसमें हल्दी लगी हुई थी। अब चमन की शर्ट पर नीले सूट के नीचे एक पीला और भूरा धब्बा चमक रहा था। उसने जल्दी से अपना कोट बंद कर लिया ताकि दाग छुप सके।
दोपहर के दो बज चुके थे। बोर्ड मीटिंग का समय हो गया था। चमन को मीटिंग रूम में पानी की बोतलें रखनी थीं। वह डरते-डरते मीटिंग रूम में दाखिल हुआ। वहां वही सज्जन बैठे थे जो लिफ्ट में मिले थे। चमन के पैर कांपने लगे जब उसे पता चला कि वे सज्जन कोई और नहीं, बल्कि कंपनी के सीईओ, मिस्टर सिंघानिया थे। मिस्टर सिंघानिया ने चमन को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, ‘तो चमन, पुराने खूसट लोगों को काम सिखाने का समय आ गया?’ चमन को लगा जैसे जमीन फट जाए और वह उसमें समा जाए। उसने कांपते हाथों से पानी की बोतलें मेज पर रखनी शुरू कीं। तभी उसका पैर एक तार में फंस गया। चमन खुद को संभालने की कोशिश में सीधे मिस्टर सिंघानिया की गोद में जा गिरा। पानी की बोतल खुली थी और सारा पानी सीईओ साहब के महंगे सूट पर गिर गया। पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। चमन ने तुतली आवाज में कहा, ‘सर… वो… हाइड्रेशन बहुत जरूरी है… आपकी सेहत के लिए…’
मीटिंग में सन्नाटा तो था ही, अब वहां तनाव भी बढ़ गया था। मिस्टर सिंघानिया ने अपना चश्मा साफ किया और चमन की ओर देखा। चमन को लगा कि अब उसे जेल होगी या कम से कम नौकरी तो पक्का जाएगी। लेकिन तभी एक चमत्कार हुआ। मिस्टर सिंघानिया जोर-जोर से हंसने लगे। उन्होंने कहा, ‘पिछले दस सालों में इस बोर्ड रूम में इतनी हलचल कभी नहीं हुई। तुम वाकई ‘धमाकेदार’ एंट्री मारते हो चमन।’ चमन ने राहत की सांस ली, लेकिन मुसीबतें अभी खत्म नहीं हुई थीं। उसे प्रेजेंटेशन के लिए प्रोजेक्टर सेट करने को कहा गया। चमन ने अपना लैपटॉप कनेक्ट किया। उसे लगा कि वह अपनी प्रेजेंटेशन दिखा रहा है, लेकिन स्क्रीन पर उसकी गोवा ट्रिप की तस्वीरें चलने लगीं, जिसमें वह बनियान पहने समुद्र किनारे नाच रहा था। बोर्ड के मेंबर्स की आंखें फटी रह गईं। चमन ने तुरंत लैपटॉप बंद किया और बोला, ‘ये… ये दरअसल टीम बिल्डिंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट का एक उदाहरण था। देखिये, खुश रहना कितना जरूरी है।’
लंच का समय हुआ। चमन ने सोचा कि अब वह कोई गलती नहीं करेगा। वह कैंटीन गया और वहां ‘स्पेशल बिरयानी’ का आर्डर दिया। बिरयानी बहुत तीखी थी। चमन को हिचकी आने लगी। वह पानी ढूंढने लगा, लेकिन पानी का जग खाली था। उसने पास पड़ी एक बोतल उठाई और गटागट पी गया। उसे बाद में पता चला कि वह सिरका (vinegar) था। चमन का चेहरा लाल हो गया और उसके कान से धुआं निकलने लगा। वह पागलों की तरह कैंटीन में दौड़ने लगा। भागते-भागते वह सफाई करने वाली मशीन से टकरा गया। मशीन चालू हो गई और चमन के साथ पूरे कैंटीन में गोल-गोल घूमने लगी। लोग तालियां बजाने लगे, उन्हें लगा कि यह कोई ‘फ्लैश मॉब’ या मनोरंजन का कार्यक्रम है। आख़िरकार एक कर्मचारी ने मशीन बंद की और चमन को नीचे उतारा। चमन के बाल खड़े हो गए थे और उसका चश्मा टेढ़ा हो गया था।
शाम के पांच बज रहे थे। चमन अपनी डेस्क पर चुपचाप बैठा था, इस डर से कि कहीं हिलने-डुलने से कोई और आपदा न आ जाए। तभी श्रीमती बत्रा उसके पास आईं। चमन ने अपना बैग उठाया और कहा, ‘मैम, मुझे पता है, मुझे निकाल दिया गया है। मैं खुद ही जा रहा हूँ।’ श्रीमती बत्रा हंसी और बोलीं, ‘पागल हो क्या चमन? मिस्टर सिंघानिया तुम्हें बुला रहे हैं। उन्हें तुम्हारा ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ रवैया पसंद आया है। वह कह रहे हैं कि उन्हें ऐसे ही निडर और मनोरंजक लोगों की जरूरत है जो ऑफिस के बोरियत भरे माहौल को बदल सकें। लेकिन हां, उन्होंने एक शर्त रखी है कि तुम कभी भी मशीनों और पानी की बोतलों के पास नहीं जाओगे।’ चमन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे न केवल नौकरी पर रखा गया, बल्कि उसे ‘चीफ कल्चरल ऑफिसर’ का एक नया पद दिया गया, जिसका काम ऑफिस में खुशियां फैलाना था।
चमन जब घर पहुंचा, तो वह थका हुआ था लेकिन उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी। माँ ने पूछा, ‘कैसा रहा पहला दिन बेटा? नाम रोशन किया न?’ चमन ने अपनी फटी हुई शर्ट और टेढ़ा चश्मा दिखाते हुए कहा, ‘माँ, नाम तो ऐसा रोशन हुआ है कि पूरी कंपनी अगले दस साल तक चमन लाल को नहीं भूलेगी।’ उसने अपनी डायरी निकाली और पहले दिन का अनुभव लिखा: ‘नौकरी का पहला दिन – मुसीबतें हजार, लेकिन अगर दिल में हिम्मत और चेहरे पर हंसी हो, तो हर मुसीबत एक कॉमेडी सीन बन जाती है।’ चमन लाल अब केवल एक कर्मचारी नहीं था, वह उस ऑफिस की जान बन चुका था। उसकी बेवकूफियां अब किस्से बन चुकी थीं और उसकी हिम्मत एक मिसाल। उसने समझ लिया था कि परफेक्शन में वो मजा नहीं है, जो अपनी गलतियों पर हंसने और उनसे सीखने में है। और इस तरह, चमन लाल की ‘धमाकेदार’ पहली नौकरी का अंत एक सुखद शुरुआत के साथ हुआ। रात को सोते समय चमन ने बस एक ही दुआ मांगी, ‘हे भगवान, कल ऑफिस में लिफ्ट खराब न हो, वरना मुझे नौ मंजिल चढ़ना पड़ेगा और मेरा सूट फिर से जवाब दे देगा।’
