समीर और बंटी की दोस्ती उस समय की थी जब दोनों निकर पहनकर मोहल्ले की गलियों में टायर दौड़ाया करते थे। समीर शांत, सुशील और थोड़ा संकोची स्वभाव का था, जबकि बंटी? बंटी वह इंसान था जो शांति की सभा में भी पटाखे फोड़ दे। जब समीर की शादी कनिका से तय हुई, तो उसने बंटी को बुलाया और हाथ जोड़कर कहा, देख भाई, मेरी शादी है, कोई कांड मत कर देना। बंटी ने सीने पर हाथ रखकर कसम खाई, अबे तू पागल है क्या? तेरी शादी मेरी शादी है। मैं तो बस व्यवस्था संभालूँगा। लेकिन समीर जानता था कि बंटी और व्यवस्था दो अलग-अलग ध्रुव हैं। शादी जयपुर के एक आलीशान रिसॉर्ट में तय हुई थी। तीन दिनों का कार्यक्रम था और बंटी ने पहले ही दिन अपने तेवर दिखा दिए।
कांड नंबर 1: संगेत का धमाका
संगीत की रात थी। बंटी ने खुद को ‘इवेंट मैनेजर’ घोषित कर दिया था। उसने समीर से कहा, भाई, तेरी एंट्री इतनी जबरदस्त होगी कि कनिका के घरवाले देखते रह जाएंगे। बंटी ने एक पुरानी क्रेन किराए पर ली और उस पर एक बड़ा सा नकली गुलाब का फूल लगवाया। समीर को उस फूल के अंदर बैठकर ऊपर से नीचे उतरना था। समीर डरा हुआ था, पर बंटी के जोश के आगे उसकी एक न चली। जैसे ही संगेत शुरू हुआ, बंटी ने रिमोट संभाला। समीर गुलाब के अंदर बैठा पसीने-पसीने हो रहा था। बंटी ने गलती से ‘स्पीड’ का बटन दो बार दबा दिया। समीर की एंट्री हुई नहीं, बल्कि वह आसमान से किसी उल्कापिंड की तरह नीचे आया। क्रेन का हुक अटक गया और समीर बीच हवा में उल्टा लटक गया। नीचे कनिका के पिताजी, जो खुद एक रिटायर्ड जज थे, अपनी ऐनक ठीक करते रह गए। समीर ऊपर से चिल्ला रहा था, बंटी, मुझे नीचे उतार! और बंटी म्यूजिक वाले से कह रहा था, ओए, ‘तड़प-तड़प के इस दिल से’ मत बजा, ‘हवा हवाई’ लगा! आधे घंटे बाद समीर को अग्निशमन दल की सीढ़ी से नीचे उतारा गया। कनिका के पिता ने समीर से पूछा, बेटा, ये तुम्हारी पसंद का दोस्त है? समीर के पास कोई जवाब नहीं था।
कांड नंबर 2: हल्दी का ‘पक्का’ रंग
अगली सुबह हल्दी की रस्म थी। बंटी को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह शुद्ध जैविक (organic) हल्दी लेकर आए। बंटी बाजार गया, लेकिन रास्ते में उसे एक पेंट की दुकान दिख गई। उसने सोचा, यार ये हल्दी तो आधे घंटे में धुल जाएगी, कुछ ऐसा लाऊं जो समीर के चेहरे पर शादी तक टिके। उसने दुकानदार से कहा, भाई, सबसे पक्का पीला रंग दो। दुकानदार ने उसे इंडस्ट्रियल ग्रेड का पीला डाई पकड़ा दिया। बंटी ने उसे हल्दी में मिला दिया। जब हल्दी की रस्म शुरू हुई, बंटी ने सबसे पहले समीर के पूरे चेहरे और गर्दन पर वह ‘हल्दी’ थोप दी। समीर चहक रहा था, पर जैसे ही उसे नहलाया गया, हंगामा मच गया। समीर का शरीर नहीं, बल्कि वह खुद एक ‘इमली का लडू’ या ‘पीला भूत’ लग रहा था। साबुन लगाया गया, रगड़ा गया, यहाँ तक कि बंटी ने उसे बर्तन धोने वाले जूने से रगड़ने की कोशिश की, पर रंग टस से मस न हुआ। अंत में समीर की शादी की फोटो में वह पीला नहीं, बल्कि नियॉन ऑरेंज चमक रहा था। कनिका ने जब उसे देखा, तो उसने अपना माथा पीट लिया।
कांड नंबर 3: स्वागत की ‘विशेष’ ठंडाई
शाम को बारात आने वाली थी। बंटी को स्वागत ड्रिंक्स का जिम्मा मिला। उसने सोचा कि मेहमान थक गए होंगे, उन्हें कुछ ऊर्जा देनी चाहिए। उसने चुपके से अपने एक दोस्त ‘कल्लू’ को बुलाया और कहा, यार, थोड़ी ‘जड़ी-बूटी’ का इंतजाम कर। बंटी ने स्वागत की ठंडाई में हल्की सी भांग मिला दी, ये सोचकर कि सब हंसी-मजाक करेंगे। लेकिन बंटी को अंदाजा नहीं था कि कनिका के मामाजी, जो बहुत ही सख्त मिजाज के थे, तीन गिलास ठंडाई गटक जाएंगे। बारात लगने से पहले ही मामाजी घोड़ी पर चढ़ गए और बारात के बैंड के साथ ‘नागिन डांस’ करने लगे। सिर्फ मामाजी ही नहीं, पंडित जी भी मंडप में बैठकर ‘बेबी डॉल मैं सोने दी’ गाने लगे। समीर का सिर चकरा रहा था। बंटी कोने में खड़ा होकर सबको समझा रहा था, अरे ये तो खुशी के आंसू हैं भाई, सब भावनाओं में बह गए हैं। तभी समीर के ससुर जी आए और बंटी की गर्दन पकड़ ली। बंटी ने बड़ी मासूमियत से कहा, अंकल, ठंडाई पीजिए, दिमाग ठंडा रहेगा।
कांड नंबर 4: शेरवानी का सत्यानाश
शादी के मुख्य मुहूर्त से दो घंटे पहले समीर अपनी शेरवानी ढूंढ रहा था। बंटी ने शेरवानी को प्रेस करवाने की जिम्मेदारी ली थी। जब वह वापस आया, तो शेरवानी की जगह उसके हाथ में एक छोटा सा सफेद कुर्ता था। समीर ने पूछा, ये क्या है? बंटी रोते हुए बोला, भाई, वो प्रेस वाले ने ज्यादा गरम कर दिया, शेरवानी जल गई। तो मैंने ये पड़ोस के कमरे से एक छोटा कुर्ता मांग लिया है। समीर ने चिल्लाकर कहा, बंटी, ये बच्चे का कुर्ता है! बंटी ने कहा, थोड़ा टाइट होगा भाई, पर फिटिंग अच्छी आएगी। हार मानकर समीर को अपने छोटे भाई की पुरानी शेरवानी पहननी पड़ी, जो उसकी बाहों से चार इंच ऊपर थी। समीर ऐसा लग रहा था जैसे वह शादी करने नहीं, बल्कि कुश्ती लड़ने जा रहा हो।
कांड नंबर 5: वरमाला और ‘अदृश्य’ अंगूठी
सबसे बड़ा कांड तो वरमाला के समय हुआ। जब रिंग सेरेमनी की बारी आई, तो अंगूठी बंटी के पास थी। बंटी ने अंगूठी की डिब्बी निकाली, पर वह खाली थी। बंटी ने जेबें टटोलीं, कुर्ते के कोने देखे, पर अंगूठी गायब थी। समीर ने दांत पीसते हुए पूछा, कहाँ है? बंटी ने याद करने की कोशिश की, ओह! वो जब मैं मामाजी के साथ नागिन डांस कर रहा था, तब शायद गिर गई होगी। पूरी शादी रुक गई। सौ मेहमान टॉर्च लेकर घास पर अंगूठी ढूंढने लगे। अंत में बंटी ने अपनी सोने की चेन तोड़ी और उसका एक छल्ला बनाकर समीर को दिया। उसने कहा, भाई, भावनाएं देखो, सोना तो सोना है। कनिका रोने वाली थी, पर समीर ने उसे चुप कराया।
शादी का समापन
जैसे-तैसे फेरे हुए। विदाई का वक्त आया। सब भावुक थे। कनिका की मां रो रही थीं। समीर भी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत को लेकर गंभीर था। तभी बंटी माइक पर आया और बोला, दोस्तों, आज मेरे भाई की शादी है। मैं इसके लिए एक सरप्राइज लाया हूँ। उसने एक बटन दबाया और पीछे आसमान में आतिशबाजी शुरू हुई। लेकिन बंटी ने पटाखे उलटे सेट कर दिए थे। रॉकेट मेहमानों की तरफ और डाइनिंग एरिया की ओर भागने लगे। लोग अपनी प्लेटें छोड़कर जान बचाकर भागे। हलवाई की कड़ाही में एक रॉकेट जा गिरा और गरम चाशनी चारों तरफ उड़ गई।
समीर ने बंटी को गले लगाया और कान में कहा, बंटी, अगर तू मेरा दोस्त न होता, तो आज मैं तुझे इसी मंडप में बलि चढ़ा देता। बंटी मुस्कुराया और बोला, देख भाई, शादी तो यादगार हो गई न? अब पूरी दुनिया इस ‘कांड’ को याद रखेगी। कनिका भी अपनी हंसी नहीं रोक पाई। उसने समीर से कहा, तुम्हारे दोस्त थोड़े अजीब हैं, पर दिल के साफ हैं। बंटी ने तुरंत कहा, भाभी, अगली बार जब आप आएंगी, तो मैं इससे भी बड़ा सरप्राइज दूंगा। समीर ने तुरंत उसका मुंह दबाया और उसे गाड़ी से दूर धकेला।
आज भी जब समीर और कनिका अपनी शादी की एल्बम देखते हैं, तो समीर का वह ‘नियॉन’ चेहरा और बंटी की वह मासूमियत भरी शरारतें उन्हें खूब हंसाती हैं। बंटी ने सच में वह शादी ऐतिहासिक बना दी थी। समीर को एहसास हुआ कि जिंदगी में सब कुछ परफेक्ट हो तो वह कहानी नहीं बनती, कहानी तो उन ‘कांडों’ से बनती है जो अपनों के साथ किए जाएं। बंटी आज भी समीर का सबसे अच्छा दोस्त है, और समीर आज भी अपनी हर सालगिरह पर बंटी को घर से दूर रखने की कोशिश करता है, पर बंटी तो बंटी है, वह खिड़की से भी घुसकर कोई न कोई नया कांड कर ही देता है।
