भोलाराम जी के जीवन का एक ही मंत्र था— ‘नियोजन’। उनके लिए दुनिया का हर काम एक समय सारिणी के अनुसार होना चाहिए था। उनके घर की दीवार पर टंगा कैलेंडर किसी युद्ध की रणनीति जैसा दिखता था, जहाँ हर तारीख पर लाल, नीले और हरे रंग के गोले बने होते थे। भोलाराम जी का मानना था कि अगर आप योजना बनाकर चलें, तो ईश्वर भी आपकी सफलता को नहीं रोक सकता। लेकिन उस दिन ईश्वर शायद छुट्टी पर थे और भाग्य ने भोलाराम जी के साथ ‘प्रैंक’ करने की ठान ली थी।
वह मंगलवार का दिन था। भोलाराम जी के लिए यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। एक तो उनकी बेटी पिंकी के लिए लड़के वाले उसे देखने आ रहे थे, और दूसरा, उसी दोपहर उनके ऑफिस में एक बहुत बड़ी जापानी कंपनी के साथ प्रेजेंटेशन थी, जिससे उन्हें प्रमोशन मिलना तय था। भोलाराम जी ने पिछले एक महीने से इस दिन की तैयारी की थी। उन्होंने अपनी पत्नी विमला को सख्त हिदायत दी थी कि सुबह ठीक 6 बजे उन्हें जगा दिया जाए।
लेकिन हुआ यह कि विमला ने अलार्म तो लगाया, पर वह अलार्म भोलाराम जी के फोन में नहीं, बल्कि उनके पोते के खिलौने वाले फोन में लग गया। सुबह 6 बजे अलार्म की जगह ‘छुक-छुक करती आई रेलगाड़ी’ वाला गाना बजा। भोलाराम जी को सपने में लगा कि वे किसी ट्रेन में सफर कर रहे हैं और वे और गहरी नींद में सो गए। जब उनकी आँख खुली, तो घड़ी में 8 बज रहे थे। भोलाराम जी के जीवन का ‘परफेक्ट’ प्लान पहली ही सीढ़ी पर लड़खड़ा गया।
वे हड़बड़ाहट में बिस्तर से कूदे। बाथरूम में घुसे तो पता चला कि गीजर खराब हो गया है। ठंडे पानी से नहाते समय उनके मुँह से जो ‘शिव तांडव’ निकला, वह पूरे मोहल्ले ने सुना। बाहर आकर उन्होंने अपनी अलमारी खोली। उन्होंने अपनी ‘लकी’ नीली शर्ट और काली पैंट पहले ही प्रेस करके रखी थी। लेकिन अंधेरे और जल्दबाजी में उन्होंने जो पहना, वह कुछ और ही था। असल में, विमला ने अलमारी में अपने नए नीले रंग का लंबा कुर्ता और काली लेगिंग्स भी वहीं रखी थी। भोलाराम जी ने बिना देखे उन्हें पहन लिया। वे थोड़े टाइट तो लग रहे थे, पर भोलाराम जी को लगा कि शायद जिम न जाने की वजह से उनका वजन बढ़ गया है।
जब वे नाश्ते की मेज पर आए, तो पिंकी और विमला उन्हें देखकर पत्थर की मूर्ति बन गईं। विमला ने चिल्लाकर कहा, ‘अरे ओ भाग्यवान! यह आपने मेरा नया सिल्क का कुर्ता और चूड़ीदार पैंट क्यों पहन ली?’ भोलाराम जी ने आईने में खुद को देखा। वे किसी कॉर्पोरेट ऑफिसर की जगह ‘शान्ति निकेतन’ के कलाकार लग रहे थे। आनन-फानन में कपड़े बदले गए, लेकिन इस चक्कर में उनके मोजे गायब हो गए। उन्होंने जल्दी में एक पैर में सफ़ेद और दूसरे में भूरा मोजा पहन लिया।
नाश्ते की मेज पर दूसरा बड़ा हादसा हुआ। भोलाराम जी ने अपनी फाइल और पिंकी के बायोडाटा वाली फाइल को मेज पर रखा था। साथ ही वहाँ पिंकी की कुकिंग क्लास की रेसिपी बुक भी थी। प्रेजेंटेशन की जल्दी में भोलाराम जी ने ऑफिस की फाइल की जगह गलती से ‘101 प्रकार के अचार और पापड़’ वाली रेसिपी बुक अपने बैग में डाल ली।
ऑफिस के लिए निकलते समय उनकी गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। उन्होंने अपनी पत्नी की स्कूटी ली। रास्ते में एक आवारा कुत्ते ने उनका पीछा कर लिया। स्कूटी भगाते समय भोलाराम जी का कीमती चश्मा नीचे गिर गया और उस पर से एक ट्रक गुज़र गया। अब भोलाराम जी बिना चश्मे के लगभग अंधे थे। उन्हें धुंधला-धुंधला ही दिखाई दे रहा था।
वे ऑफिस पहुँचे। जापानी डेलिगेट्स और उनके बॉस मिस्टर खन्ना पहले से ही कॉन्फ्रेंस रूम में बैठे थे। भोलाराम जी पसीने से तर-बतर अंदर घुसे। मिस्टर खन्ना ने उन्हें घूर कर देखा, ‘भोलाराम! तुम लेट हो। और यह तुम्हारे चेहरे पर क्या लगा है?’ भोलाराम जी ने हाथ लगाया तो पता चला कि नाश्ते का जैम उनके गाल पर चिपका हुआ था। उन्होंने उसे पोंछा और सीधे प्रेजेंटेशन शुरू कर दी।
‘सर, हमारी कंपनी की भविष्य की योजनाएँ इस फाइल में हैं,’ भोलाराम जी ने गर्व से कहा और बैग से वह ‘रेसिपी बुक’ निकालकर प्रोजेक्टर के नीचे रख दी। बिना चश्मे के उन्हें कुछ दिख नहीं रहा था। उन्होंने पहला पन्ना पलटा और आत्मविश्वास के साथ बोलना शुरू किया, ‘हमारी पहली रणनीति है- आम को अच्छी तरह धोकर सुखाना।’ जापानी डेलिगेट्स एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। जापानी टीम के लीडर ने अनुवादक से पूछा, ‘क्या यह कोई नई बिजनेस कोडिंग है?’
भोलाराम जी जारी रहे, ‘इसके बाद हम इसमें ढाई चम्मच मेथी दाना और स्वादानुसार नमक डालेंगे। अगर हम इस प्रक्रिया को सही से फॉलो करेंगे, तो दो साल के भीतर हमारा प्रॉफिट मार्केट में खट्टा-मीठा स्वाद छोड़ देगा।’ मिस्टर खन्ना का चेहरा लाल हो गया था। उन्होंने दांत पीसते हुए कहा, ‘भोलाराम, यह क्या बकवास है?’ पर भोलाराम जी को लगा कि बॉस उनकी क्रिएटिविटी की तारीफ कर रहे हैं। उन्होंने अगला पन्ना पलटा, ‘और सर, यदि कॉम्पिटिशन बढ़े, तो हमें इसमें थोड़ी लाल मिर्च ज्यादा डाल देनी चाहिए ताकि प्रतिद्वंदियों के कान से धुआं निकल जाए।’
तभी एक जापानी डेलिगेट ने हंसते हुए कहा, ‘मिस्टर भोलाराम, योर बिजनेस मॉडल इज वैरी स्पाइसी!’ पूरे कमरे में ठहाके गूंजने लगे। भोलाराम जी को जब अपनी गलती का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्हें अपनी फाइल नहीं मिल रही थी। अचानक उनके फोन की घंटी बजी। वह विमला थी। विमला ने चिल्लाकर कहा, ‘अरे! लड़के वाले घर आ गए हैं और आप पिंकी की फोटो और कुंडली की जगह ऑफिस के टेंडर के कागज यहाँ छोड़ गए हैं!’
भोलाराम जी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बॉस से माफी मांगी और घर की तरफ भागे। रास्ते में फिर वही कुत्ता मिल गया। इस बार भोलाराम जी ने स्कूटी इतनी तेज भगाई कि वे सीधे अपने घर के सामने वाले कीचड़ के गड्ढे में जा गिरे। जब वे घर के अंदर घुसे, तो उनकी हालत किसी युद्ध से लौटे घायल सैनिक जैसी थी। कीचड़ में लथपथ, एक पैर में अलग रंग का मोजा और सिर पर एक पत्ता अटका हुआ था।
पिंकी के होने वाले ससुराल वाले सोफे पर बैठे थे। लड़के का बाप, जो कि एक रिटायर्ड कर्नल था, बहुत ही सख्त मिजाज लग रहा था। भोलाराम जी को देखते ही कर्नल साहब खड़े हो गए और बोले, ‘यह कौन है? क्या यही इस घर के मुखिया हैं?’ विमला ने शर्म से अपना सिर झुका लिया। भोलाराम जी ने संभलने की कोशिश की और कहा, ‘नमस्कार! मैं भोलाराम हूँ। रास्ते में ज़रा ‘इन्वेस्टमेंट’ का जायज़ा ले रहा था, तो थोड़ा सा ‘मार्केट क्रैश’ (कीचड़ में गिरना) हो गया।’
कर्नल साहब को लगा कि भोलाराम जी कोई बहुत बड़े मजाकिये इंसान हैं। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, ‘चलो, कम से कम आप गंभीर नहीं हैं।’ बातचीत शुरू हुई। भोलाराम जी को पिंकी की तारीफ करनी थी, लेकिन उनके दिमाग में अभी भी ऑफिस की प्रेजेंटेशन घूम रही थी। कर्नल साहब ने पूछा, ‘आपकी बेटी के क्या गुण हैं?’
भोलाराम जी ने जोश में आकर कह दिया, ‘सर, हमारी पिंकी की सालाना ग्रोथ रेट 20% है। वह पूरी तरह से ‘आईएसओ सर्टिफाइड’ है और उसमें मल्टी-टास्किंग की इतनी क्षमता है कि वह एक साथ तीन शिफ्टों में काम कर सकती है। यदि आप उसे अपने घर ले जाते हैं, तो आपको अगले पांच सालों तक किसी भी प्रकार के ‘मेंटेनेंस’ की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।’
लड़के वाले सन्न रह गए। लड़के की माँ ने पूछा, ‘भाई साहब, हम बहू की बात कर रहे हैं या किसी मशीन की?’ भोलाराम जी को अपनी गलती समझ आई। उन्होंने बात सुधारते हुए कहा, ‘मेरा मतलब है कि वह बहुत गुणी है। वह इतना अच्छा खाना बनाती है कि जापानी डेलिगेट्स भी उसके ‘अचार और पापड़’ की रणनीति के कायल हैं।’
तभी भोलाराम जी की जेब से उनका फोन गिरा और लाउडस्पीकर पर मिस्टर खन्ना (बॉस) की आवाज आने लगी। बॉस चिल्ला रहे थे, ‘भोलाराम! तुम जीनियस हो! उन जापानियों को तुम्हारा ‘अचार बिजनेस मॉडल’ इतना पसंद आया कि वे अब हमारी कंपनी के साथ मिलकर एक नई फूड चेन शुरू करना चाहते हैं। तुम्हारा प्रमोशन पक्का है!’
यह सुनकर घर में सन्नाटा छा गया। कर्नल साहब अचानक जोर-जोर से हंसने लगे। उन्होंने कहा, ‘भोलाराम जी, मुझे ऐसे ही दामाद की तलाश थी जिसके पास इतना गजब का सेंस ऑफ ह्यूमर और बिजनेस माइंड हो। हमें यह रिश्ता मंजूर है!’
भोलाराम जी ने राहत की सांस ली। उन्होंने सोचा था कि आज सब कुछ उल्टा हो गया है, लेकिन नियति का अपना ही तरीका होता है। सुबह की ‘रेलगाड़ी’ वाले अलार्म से लेकर, पत्नी के कुर्ते, गलत फाइल, कीचड़ के गड्ढे और जापानी डेलिगेट्स को अचार खिलाने तक— सब कुछ एक ऐसी कॉमेडी फिल्म की तरह था जिसका अंत सुखद रहा।
उस शाम, भोलाराम जी ने अपनी ‘परफेक्ट प्लानिंग’ वाली डायरी को कचरे के डिब्बे में डाल दिया। विमला ने पूछा, ‘यह क्या कर रहे हो?’ भोलाराम जी मुस्कुराकर बोले, ‘अब से कोई प्लानिंग नहीं। क्योंकि जब सब कुछ उल्टा होता है, तभी तो कुछ नया और अच्छा होता है!’
विमला ने चाय का कप पकड़ाते हुए कहा, ‘चलिए, अब ज्यादा ज्ञान मत झाड़िए। यह बताइए कि जो मेरा नया कुर्ता आपने पहना था, उसकी सिलाई उखड़ गई है, उसका हर्जाना कौन देगा?’ भोलाराम जी ने सिर पकड़ लिया और पूरा घर ठहाकों से गूंज उठा। उस दिन भोलाराम जी ने सीखा कि जिंदगी को घड़ी की सुइयों पर नहीं, बल्कि दिल की धड़कनों और हंसी के ठहाकों पर जीना चाहिए। आखिर ‘उल्टा’ भी कभी-कभी ‘सीधा’ से बेहतर परिणाम दे जाता है।
