किसी महापुरुष ने कहा था कि सच कड़वा होता है, लेकिन हमारे शहर के गगन बिहारी उर्फ गप्पू भैया का मानना था कि सच न केवल कड़वा होता है बल्कि बेहद उबाऊ और फीका भी होता है। गगन बिहारी का व्यक्तित्व ऐसा था कि यदि वे कहें कि आज सूरज पूर्व से निकला है, तो मोहल्ले के लोग एक बार पंचांग देखने बैठ जाते थे। उनके झूठ बोलना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक कला थी। वे झूठ को इतनी नजाकत, इतनी बारीकी और इतने विश्वास के साथ परोसते थे कि सुनने वाले को लगता था कि अगर यह सच नहीं है, तो सच को तो डूब मरना चाहिए।
गगन बिहारी का हुलिया भी उनके झूठों की तरह ही भव्य था। वे हमेशा कड़क इस्तरी किया हुआ कुर्ता पहनते, आँखों पर थोड़ा महँगा चश्मा लगाते और हाथ में एक ऐसी घड़ी पहनते थे जिसके बारे में उनका दावा था कि वह उन्हें स्विट्जरलैंड के किसी राजा ने उपहार में दी थी, क्योंकि उन्होंने एक बार उस राजा को रास्ता भटकने से बचाया था। अब भला कोई गप्पू जी से यह कैसे पूछता कि स्विट्जरलैंड का राजा उत्तर प्रदेश के इस छोटे से जिले में रास्ता कैसे भटक गया? लेकिन गप्पू भैया का आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ढाल था।
गगन बिहारी की दिनचर्या मोहल्ले की ‘लल्लन चाय की टपरी’ से शुरू होती थी। एक सुबह जब वे टपरी पर पहुँचे, तो वहाँ काफी भीड़ थी। गप्पू भैया ने अपनी कुर्सी संभाली और चाय का घूँट भरते हुए बोले, ‘लल्लन, कल रात नींद नहीं आई यार। बिल गेट्स का बार-बार फोन आ रहा था। कह रहा था कि गगन भाई, विंडोज का नया अपडेट समझ नहीं आ रहा, जरा रिमोट पर आकर समझा दो।’ पूरी टपरी में सन्नाटा छा गया। लल्लन ने पूछा, ‘लेकिन गप्पू भैया, आपको तो अपना एंड्रॉइड फोन भी ठीक से चलाना नहीं आता, आप बिल गेट्स को क्या समझाएंगे?’ गप्पू भैया ने बिना पलक झपकाए उत्तर दिया, ‘यही तो बात है लल्लन! जो चीज हमें नहीं आती, वही तो हम दुनिया को सिखाते हैं। विशेषज्ञता इसी का नाम है।’
गगन बिहारी के झूठों की फेहरिस्त बहुत लंबी थी। एक बार उन्होंने पूरे मोहल्ले में यह फैला दिया कि उनके घर के पिछले आँगन में खुदाई के दौरान मुगल काल का एक खजाना निकला है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि उस खजाने में एक ऐसा जादुई चिराग है जिसे रगड़ने पर जो निकलता है, वह काम तो कुछ नहीं करता लेकिन बहुत अच्छी उर्दू बोलता है। तीन दिनों तक उनके घर के बाहर भीड़ लगी रही। जब चौथे दिन लोगों ने खजाना दिखाने की जिद की, तो गप्पू भैया ने बड़े ही मासूम चेहरे के साथ कहा, ‘भाइयों, कल रात सरकारी खुफिया एजेंसी वाले आए थे और सारा खजाना ले गए। बोले कि देश की अर्थव्यवस्था खतरे में है, गगन जी, आप ही बचा सकते हैं। अब देश प्रेम के आगे सोने की अशर्फियां क्या चीज हैं?’ मोहल्ले वाले अपना सा सिर लेकर लौट गए, पर गप्पू भैया की साख फिर भी बरकरार रही।
कहानी में असली मोड़ तब आया जब मोहल्ले के सबसे अमीर और कड़क मिजाज सेठ धनीराम की बेटी की शादी तय हुई। सेठ धनीराम को गप्पू भैया के झूठों से सख्त नफरत थी। वे अक्सर कहते थे, ‘गगन, जिस दिन तुमने एक पूरा दिन सच बोला, मैं तुम्हें एक लाख रुपये का इनाम दूँगा।’ गप्पू भैया ने मुस्कराते हुए कहा था, ‘सेठ जी, इनाम तो मैं ले लूँ, पर सच बोलने से दुनिया का जो संतुलन बिगड़ेगा, उसका हर्जाना कौन भरेगा?’
शादी की तैयारियों के बीच गप्पू भैया ने एक नया ‘बम’ फोड़ा। उन्होंने दावा किया कि इस शादी में जो मशहूर शहनाई वादक आ रहे हैं, वे उनके चचेरे भाई के साले के लंगोटिया यार हैं और वे गप्पू भैया के कहे बिना पहली धुन नहीं छेड़ेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी अफवाह उड़ा दी कि शादी में शहर के डीएम साहब तो आएंगे ही, साथ ही गृह मंत्रालय से भी कुछ ‘खास मेहमान’ आने वाले हैं जो गप्पू भैया की सुरक्षा की जांच करने के लिए पहले से ही सादे कपड़ों में घूम रहे हैं।
पूरा मोहल्ला खौफ और उत्साह के बीच झूलने लगा। लोग गप्पू भैया को ज्यादा इज्जत देने लगे। कोई उन्हें मिठाई खिलाता, तो कोई अपने बच्चों की नौकरी के लिए सिफारिश करने को कहता। गप्पू भैया भी पूरी तल्लीनता से सबकी अर्जी सुनते और डायरी में नोट करते। वे कहते, ‘चिंता मत करो, कल सुबह गृह मंत्री से नाश्ते पर बात करूँगा। तुम्हारा काम समझो हो गया।’
शादी वाले दिन गप्पू भैया ने अपनी तैयारी ऐसी की जैसे वे खुद दूल्हा हों। उन्होंने रेशमी शेरवानी पहनी और एक ऐसा इत्र लगाया जिसकी खुशबू से मोहल्ले के कुत्ते तक बेहोश होने लगे थे। शादी समारोह शानदार था। तभी अचानक एक सफेद चमचमाती गाड़ी रुकी और उसमें से एक वीआईपी व्यक्ति नीचे उतरा। गप्पू भैया ने तुरंत चिल्लाकर कहा, ‘अरे! ये तो मेरा छोटा भाई ‘मोंटी’ है, जो लंदन में परमाणु वैज्ञानिक है! मैंने इसे मना किया था कि शादी में मत आना, भीड़ बहुत होगी, पर देखो, भाई का प्यार खींच लाया।’
वे दौड़कर उस व्यक्ति के पास गए और उसे गले लगा लिया। वह व्यक्ति हक्का-बक्का रह गया। उसने गप्पू भैया को धक्का देते हुए पूछा, ‘भाई साहब, आप कौन हैं? और ये मोंटी कौन है? मैं तो आयकर विभाग (Income Tax) से हूँ और मुझे सेठ धनीराम के खातों की जांच करने के लिए भेजा गया है।’ जैसे ही ‘आयकर विभाग’ का नाम आया, शादी के पंडाल में सन्नाटा पसर गया। सेठ धनीराम के चेहरे का रंग उड़ गया। गप्पू भैया ने एक पल के लिए अपनी आँखें झपकाईं, फिर अचानक उस अधिकारी के कान में फुसफुसाते हुए बोले, ‘अरे ऑफिसर साहब, एक्टिंग बहुत अच्छी कर रहे हो! सबको लग रहा है कि आप सच में रेड मारने आए हो। चलिए, अब अंदर चलिए, पनीर टिक्का तैयार है।’
अधिकारी बिफर गया, ‘क्या बकवास कर रहे हो? मैं असली अधिकारी हूँ!’ गप्पू भैया ने पलटकर भीड़ से कहा, ‘देखा? इसे कहते हैं डेडीकेशन! ये ऑफिसर की वर्दी में मेरा दोस्त ही है, हमने मिलकर सेठ जी को डराने का प्रैंक (Prank) किया था।’
सेठ धनीराम को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन आयकर अधिकारी के आने की खबर से वे डर भी गए थे। उन्होंने अधिकारी को एकांत में ले जाकर बात की, तो पता चला कि वह सच में अधिकारी था और किसी गुमनाम शिकायत पर आया था। जब जांच हुई तो पता चला कि शिकायत किसी और ने नहीं, बल्कि गप्पू भैया ने ही खुद के नाम से की थी ताकि वे शादी में ‘वीआईपी’ का स्वागत करने का नाटक कर सकें। हालांकि, उनका अनुमान गलत निकला, उन्होंने सोचा था कि कोई मामूली क्लर्क आएगा जिसे वे अपना दोस्त बता देंगे, पर यहाँ तो सचमुच का ‘छापा’ पड़ गया।
खैर, मामला जैसे-तैसे शांत हुआ। लेकिन गप्पू भैया कहाँ मानने वाले थे। जब उनसे पूछा गया कि वह अधिकारी उन्हें पहचान क्यों नहीं रहा था, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘दरअसल, वह मेरी याददाश्त खोने वाली बीमारी का हिस्सा था। पिछले साल हम दोनों एक गुप्त मिशन पर अमेज़न के जंगलों में थे, वहाँ एक जहरीले मेंढक ने उसे काट लिया था, तब से वह अपनों को नहीं पहचानता। मुझे दुख है कि वह मुझे भूल गया, पर देश सेवा के लिए यह बलिदान जरूरी था।’
गगन बिहारी की पत्नी, सुशीला, उनके इन झूठों से सबसे ज्यादा परेशान रहती थी। एक दिन उसने ठान लिया कि वह गगन को रंगे हाथों पकड़ेगी। सुशीला ने मोहल्ले की औरतों के सामने कहा, ‘मेरे मायके से खबर आई है कि मेरे भाई को लॉटरी लगी है और वह हमें पाँच करोड़ रुपये देने आ रहा है।’ गगन बिहारी ने जैसे ही यह सुना, उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक आई, लेकिन फिर वे संभल गए। वे बोले, ‘पाँच करोड़? बस? सुशीला, कल ही तो मैंने अपने बैंक मैनेजर से कहा था कि मेरे खाते में जो सात सौ करोड़ का ट्रांजैक्शन अटका है, उसे चैरिटी में डाल दो। हमें पाँच करोड़ की क्या जरूरत?’
सुशीला ने तंज कसा, ‘तो दिखाओ अपना बैंक बैलेंस?’ गगन बिहारी ने अपना पुराना खटारा मोबाइल निकाला और एक फर्जी मैसेज दिखाया जो उन्होंने खुद को ही भेजा था। मैसेज में लिखा था: ‘Your account has been credited with 700,00,00,000 INR for saving the world.’ सुशीला सिर पकड़ कर बैठ गई।
गगन बिहारी के जीवन का सबसे बड़ा झूठ तब सामने आया जब शहर में एक ‘असली’ शेर जंगल से निकलकर घुस आया। पूरे मोहल्ले में दहशत फैल गई। लोग घरों में दुबक गए। गगन बिहारी ने अपनी बालकनी से चिल्लाकर कहा, ‘घबराओ मत भाइयों! मैंने बचपन में जिम कॉर्बेट पार्क में शेरों को पालतू बनाया है। मैं अभी नीचे जाकर उसे हिप्नोटाइज (सम्मोहित) कर देता हूँ।’ लोगों ने कहा, ‘गप्पू भैया, आज तो रहने दो, ये असली शेर है, कोई मोहल्ले का कुत्ता नहीं जिसे आप बिस्किट डालकर अपना चेला बना लेते हैं।’
लेकिन गप्पू भैया जोश में आ गए। वे नीचे उतरे, हाथ में एक डंडा लिया और शेर की तरफ बढ़ने लगे। शेर एक मोड़ पर खड़ा गुर्रा रहा था। गप्पू भैया ने शेर के करीब जाकर कहा, ‘ओए सुल्तान! पहचान मुझे? याद है अफ्रीका के जंगलों में जब तू छोटा सा था, मैंने तुझे दूध पिलाया था?’ शेर ने एक जोरदार दहाड़ मारी। गप्पू भैया के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। लेकिन उनका दिमाग तो झूठ की फैक्ट्री था। वे अचानक जमीन पर लेट गए और मिर्गी के दौरे का नाटक करने लगे। शेर उनके पास आया, उन्हें सूंघा और शायद यह सोचकर छोड़ दिया कि यह इंसान तो पहले से ही मरा हुआ या खराब है।
जब वन विभाग की टीम ने शेर को काबू कर लिया, तो लोग गप्पू भैया के पास दौड़े। गप्पू भैया उठकर धूल झाड़ते हुए बोले, ‘देखा? ये ‘मृत्यु-योग’ आसन है। शेर को लगा कि मैं मर चुका हूँ। ये तकनीक मैंने हिमालय के एक साधु से सीखी थी जिसने मुझे बताया था कि शेर कभी बासी खाना नहीं खाता। मैंने योग की शक्ति से अपने शरीर का तापमान जीरो डिग्री कर लिया था।’ लोगों ने तालियां बजाईं, हालांकि सबको पता था कि गप्पू भैया की जान बस बाल-बाल बची है।
गगन बिहारी के झूठ कभी किसी का नुकसान नहीं करते थे, बल्कि वे लोगों के नीरस जीवन में मनोरंजन का रंग भर देते थे। एक बार मोहल्ले के एक बुजुर्ग, रामदीन काका, बहुत बीमार थे। वे उदास थे और जीने की इच्छा छोड़ चुके थे। गप्पू भैया उनके पास गए और बोले, ‘काका, आप अभी मर नहीं सकते। यमराज का कल मेरे पास फोन आया था। वह कह रहा था कि नर्क में अभी कंस्ट्रक्शन चल रहा है और स्वर्ग के सारे बेड फुल हैं। उसने आपसे विनती की है कि कम से कम 20 साल और धरती पर ही रहें।’ रामदीन काका यह सुनकर खिलखिलाकर हँस पड़े। उस हंसी ने उनके अंदर जीने की नई उम्मीद जगा दी।
गप्पू भैया का सबसे इमोशनल झूठ वह था जो उन्होंने एक अनाथ बच्चे, छोटू से बोला था। छोटू हमेशा अपनी माँ के बारे में पूछता था। गप्पू भैया ने उसे बताया कि उसकी माँ एक अंतरिक्ष यात्री है और वह चाँद पर एक नया शहर बसाने गई है। वे रोज उसे एक ‘सितारा’ दिखाते और कहते कि तुम्हारी माँ वहीं से टॉर्च जलाकर तुम्हें ‘गुड नाईट’ कह रही है। उस बच्चे की आँखों में जो चमक होती थी, वह किसी भी सच से ज्यादा खूबसूरत थी।
समय बीतता गया और गगन बिहारी बूढ़े होने लगे, लेकिन उनके झूठों की धार कम नहीं हुई। अपनी मृत्युशय्या पर भी जब लोग उनसे मिलने आए, तो उन्होंने कमजोर आवाज में कहा, ‘यार, स्वर्ग से अप्सराएं मुझे लेने के लिए हेलीकॉप्टर लेकर आई हैं, पर मैंने उनसे कह दिया कि अभी मेरा मन नहीं है, अभी मोहल्ले में लल्लन की चाय की दुकान का उधार चुकाना बाकी है।’ लोगों की आँखों में आँसू थे, पर चेहरे पर मुस्कान।
जब गगन बिहारी का निधन हुआ, तो उनकी अलमारी से एक डायरी मिली। सबको लगा कि इसमें उनके झूठों का कच्चा चिट्ठा होगा या शायद उनके छिपे हुए खजाने का राज। लेकिन डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था: ‘मुझे पता है कि आप सबको पता है कि मैं झूठ बोलता हूँ। पर सच इतना बेरंग था कि मैंने उसे अपनी कल्पनाओं के रंगों से सजाने की कोशिश की। अगर मेरे झूठों से किसी के चेहरे पर मुस्कान आई, तो मेरा जीवन सफल रहा।’ डायरी के बाकी सारे पन्ने खाली थे।
मोहल्ले वालों ने गगन बिहारी की याद में एक ‘गप्पू चौक’ बनाया। वहाँ आज भी लोग बैठकर उनकी कहानियाँ याद करते हैं। लल्लन चाय वाला आज भी कहता है, ‘गप्पू भैया भले ही झूठे थे, पर उनका दिल एकदम सच्चा था। उन्होंने हमें सिखाया कि कभी-कभी एक खूबसूरत झूठ, एक कड़वे सच से ज्यादा सुकून दे सकता है।’
आज भी जब कभी शहर में कोई बड़ी घटना होती है, तो लोगों को गगन बिहारी की याद आती है। वे सोचते हैं कि अगर आज गप्पू भैया होते, तो जरूर कहते कि वे उस घटना के समय वहीं मौजूद थे और उन्होंने ही अपनी जादुई शक्तियों से सब ठीक किया था। गगन बिहारी उर्फ गप्पू भैया ने साबित कर दिया कि झूठ बोलना सिर्फ पाप नहीं, बल्कि एक ऐसी कहानी बुनना भी है जिसमें हर कोई शामिल होना चाहता है।
उनकी तेरहवीं पर सेठ धनीराम ने वह एक लाख रुपये का इनाम उनके परिवार को दिया। जब लोगों ने पूछा कि गप्पू ने तो कभी सच नहीं बोला, फिर इनाम कैसा? सेठ जी ने मुस्कुराकर कहा, ‘उसने अपनी पूरी जिंदगी एक सच के सहारे जी, और वह सच यह था कि वह दुनिया को खुश रखना चाहता था। उसका पूरा जीवन ही सबसे बड़ा सच था।’ और इस तरह, एक ‘झूठे’ आदमी की कहानी इतिहास के पन्नों में एक ‘सच्चे’ लीजेंड के रूप में दर्ज हो गई। गगन बिहारी आज भी लोगों की यादों में जिंदा हैं, अपनी उस घड़ी के साथ जो शायद स्विट्जरलैंड के राजा ने नहीं, बल्कि उनकी खुद की कल्पना के राजा ने उन्हें दी थी। और सच तो यह है कि उस मोहल्ले के लिए, गगन बिहारी के झूठ ही सबसे हसीन सच थे।
