रात के करीब 1:30 बजे…
शहर का सबसे सुरक्षित समझा जाने वाला पुलिस स्टेशन असामान्य रूप से शांत था।
बाहर हल्की बारिश हो रही थी…
और अंदर, ड्यूटी पर सिर्फ दो सिपाही थे—रामलाल और सुरेश।
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि…
आज रात, चोरी होने वाली थी—
👉 वो भी पुलिस स्टेशन के अंदर।
करीब 2 बजे…
एक आदमी धीरे-धीरे स्टेशन के पीछे वाले गेट से अंदर घुसा।
उसने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी।
चेहरे पर मास्क… और हाथ में एक फाइल।
सीधा वो रिकॉर्ड रूम की तरफ बढ़ा—
जहाँ पिछले 10 सालों के केस फाइल्स रखे थे।
असली मकसद
वो आदमी कोई आम चोर नहीं था…
वो ढूंढ रहा था एक खास फाइल—
👉 “केस नंबर 47/2016 – विक्रम हत्याकांड”
जैसे ही उसने फाइल निकाली…
अचानक पीछे से आवाज आई—
“कौन है वहाँ?”
सिपाही सुरेश ने उसे देख लिया था।
वो आदमी भागने लगा…
लेकिन तभी—
सुरेश ने उसका मास्क खींच लिया…
और जो चेहरा सामने आया…
उसे देखकर दोनों सिपाही जम गए।
👉 वो कोई और नहीं…
इंस्पेक्टर आरव था।
सच्चाई
आरव—जो इस केस को खुद संभाल रहा था…
उसी ने ये चोरी प्लान की थी।
क्यों?
क्योंकि उस फाइल में एक ऐसा राज छुपा था—
जो उसकी जिंदगी बर्बाद कर सकता था।
👉 असल में…
विक्रम का मर्डर किसी और ने नहीं…
खुद आरव ने किया था।
सुरेश ने तुरंत अपनी गन निकाल ली—
“सर… आप ये क्या कर रहे हैं?”
आरव ने गहरी सांस ली…
और धीरे से कहा—
“कुछ सच्चाइयाँ… सामने नहीं आनी चाहिए।”
अगले ही पल…
एक गोली की आवाज गूंजी।
सुबह जब बाकी पुलिस स्टाफ आया…
तो रिकॉर्ड रूम का दरवाजा खुला था।
फाइल गायब थी…
और जमीन पर पड़ा था—
👉 सिपाही सुरेश का शव।
इंस्पेक्टर आरव…
फिर से गायब हो चुका था।
सवाल जो रह गया…
क्या आरव हमेशा बचता रहेगा?
या कोई और उस सच्चाई तक पहुँचेगा…?
