शहनाइयों की आवाज गूंज रही थी। लाल जोड़े में सजी दुल्हन का घूंघट थोड़ा सा उठा, तो उसकी कातिलाना मुस्कान ने दूल्हे बने राहुल का दिल जीत लिया। राहुल को लग रहा था कि उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत और संस्कारी जीवनसाथी मिल गई है।
लेकिन शादी के ठीक अगले दिन की सुबह, उस आलीशान बंगले में सिर्फ सन्नाटा और चीखें बाकी थीं। तिजोरी का दरवाजा खुला था, गहने गायब थे, और सबसे बड़ी बात—वो दुल्हन भी कहीं नहीं थी।
“सर, सिर्फ कैश और जेवर ही नहीं, राहुल के पिता के बैंक अकाउंट से भी साढ़े तीन करोड़ रुपये गायब हैं,” इंस्पेक्टर समीर ने केस डायरी खोलते हुए कहा। समीर समझ चुके थे कि यह कोई आम चोरी नहीं, बल्कि ‘नकली शादी के नाम पर करोड़ों की ठगी’ करने वाला एक बेहद शातिर और संगठित गैंग है।
मैट्रिमोनियल साइट और हाई-प्रोफाइल शिकार
ठगी का यह खेल बेहद सलीके से खेला जाता था। गैंग का सरगना, जो खुद को लड़की का संस्कारी चाचा बताता था, बड़े-बड़े बिजनेसमैन और एनआरआई (NRI) लड़कों को निशाना बनाता था। मैट्रिमोनियल साइट्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर ऐसे परिवारों को फंसाया जाता जो दिखने में सीधे और अमीर हों।
लड़की का किरदार निभाने वाली पायगा उर्फ ’सोनम’ इतनी शातिर थी कि पहली मुलाकात में ही लड़के वालों को अपना मुरीद बना लेती थी। उसकी सादगी, उसका बात करने का तरीका और उसकी नकली पारिवारिक पृष्ठभूमि देखकर किसी को शक होने का सवाल ही नहीं उठता था।
राहुल के परिवार को भी इसी जाल में फंसाया गया। शादी तय होते ही लड़की के ‘चाचा’ ने एक बिजनेस डील का बहाना बनाकर राहुल के पिता से तीन करोड़ रुपये इनवेस्ट करवा लिए। शादी के मंडप में कन्यादान भी हुआ, सात फेरे भी हुए, लेकिन वो सब एक बहुत बड़े ड्रामे का हिस्सा था।
एक ही दुल्हन, सात अलग-अलग शहर
समीर ने जब इस केस की गहराई से जांच शुरू की, तो उनके होश उड़ गए। पिछले दो सालों में देश के अलग-अलग राज्यों में ठीक इसी तरह की छह शादियां और हुई थीं। हर जगह दुल्हन का नाम अलग था, लेकिन हुलिया और ठगी का तरीका बिल्कुल एक जैसा था।
“यह लड़की कोई मामूली धोखेबाज नहीं है अमित। यह एक बहुरूपिया है, जो हर शादी के बाद अपना चेहरा और अपनी पहचान बदल लेती है,” समीर ने अपने सब-इन्स्पेक्टर से कहा।
सस्पेंस का मोड़: सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उन छह शादियों में से किसी भी परिवार ने बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। राहुल का परिवार पहला था जिसने हिम्मत दिखाई थी। लेकिन अब चुनौती यह थी कि जो दुल्हन कभी वजूद में थी ही नहीं, उसे ढूंढा कैसे जाए?
शादी का वीडियो और वो एक अजीब सुराग
समीर ने राहुल की शादी की वीडियो रिकॉर्डिंग को कई बार देखा। हर रस्म, हर हंसी और हर आंसू बिल्कुल असली लग रहे थे। लेकिन तभी समीर की पारखी नजरों ने शादी के बैकग्राउंड में खड़े एक वेटर को नोटिस किया।
वह वेटर मेहमानों को ड्रिंक्स सर्व करने के बजाय लगातार दुल्हन और उसके ‘चाचा’ को इशारे कर रहा था। समीर ने उस वेटर की फोटो को ज़ूम किया और अपने क्रिमिनल डेटाबेस में सर्च किया।
नतीजा चौंकाने वाला था। वह वेटर कोई और नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय जालसाज ‘विक्रम’ था, जो नकली शादियां करवाकर अमीर परिवारों को लूटने वाले इस गैंग का असली मास्टरमाइंड था। और जो लड़की दुल्हन बनी थी, वह कोई मजबूर लड़की नहीं, बल्कि विक्रम की अपनी सगी पत्नी थी।
अगला शिकार और पुलिस का बिछाया जाल
समीर को समझ आ गया था कि इस गैंग को पकड़ने के लिए उन्हें खुद एक शिकार बनना होगा। उन्होंने अपने एक युवा और अमीर पुलिस अफसर को बिजनेसमैन बनाकर उसी मैट्रिमोनियल साइट पर एक्टिव किया।
जल्द ही पासा सीधा पड़ा। विक्रम के गैंग ने नए शिकार को भांप लिया और सोनम की एक नई प्रोफाइल के साथ उनसे संपर्क किया। मुलाकात की जगह शहर का एक आलीशान होटल तय हुई। समीर की पूरी टीम सादे कपड़ों में होटल के चारों तरफ तैनात थी।
पायगा उर्फ सोनम अपने नकली चाचा के साथ पहुंची। वह हमेशा की तरह बेहद शालीन और खूबसूरत लग रही थी। बातचीत आगे बढ़ी और जैसे ही विक्रम ने शादी के खर्चों और एक ‘प्रॉफिटेबल बिजनेस’ के नाम पर एडवांस कैश की मांग की, समीर ने अपनी एंट्री की।
क्लाइमेक्स: मंडप सजने से पहले ही लगी हथकड़ी
“इस बार डोली नहीं, पुलिस की गाड़ी इंतजार कर रही है सोनम जी,” समीर ने टेबल पर अपनी आईडी (ID) रखते हुए मुस्कुराकर कहा।
विक्रम और पायगा ने भागने की कोशिश की, लेकिन होटल के वेटर और मैनेजर के भेष में खड़े पुलिसवालों ने उन्हें तुरंत दबोच लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से कई फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अलग-अलग राज्यों की शादियों के सर्टिफिकेट बरामद हुए।
पूछताछ में पायगा ने कबूल किया कि उन्होंने अब तक आठ परिवारों को अपनी नकली शादी के जाल में फंसाकर करीब दस करोड़ रुपये की ठगी की थी। वह हर बार शादी के बाद खाने में नशीली दवा मिलाकर पूरे परिवार को बेहोश कर देती थी और रातों-रात सारा माल समेटकर फरार हो जाती थी।
पवित्र रिश्तों की आड़ में नकाब ओढ़कर घूमते हैं जो लुटेरे, कानून का एक ही झटका उतार देता है उनके सारे चेहरे।
