आश्रम के भीतर से आ रही चंदन और लोबान की खुशबू किसी को भी सम्मोहित कर सकती थी। बाहर हजारों भक्तों की भीड़ ‘परम पूज्य त्रिकाल महाराज’ की एक झलक पाने के लिए तड़प रही थी। लेकिन उसी आश्रम के एक गुप्त तहखाने में, बंद दरवाजों के पीछे, नोटों की गड्डियां गिनी जा रही थीं और हथियारों का सौदा हो रहा था।
डीएसपी (DSP) आकाश ने भेष बदलकर भक्तों की कतार में खड़े-खड़े चारों तरफ नजर दौड़ाई। उनके कान में लगा छोटा सा वायरलेस इयरफोन चालू था। “सर, बैकअप टीम तैयार है। बस आपके इशारे का इंतजार है,” दूसरी तरफ से सब-इंस्पेक्टर नेहा की आवाज आई।
आकाश ने गहरी सांस ली। यह मामला किसी आम ठगी का नहीं था। यह एक ऐसा ‘नकली बाबा का अपराध साम्राज्य’ था जिसकी जड़ें विदेशों तक फैली थीं, और जिसके पास आस्था की वो ढाल थी जिसे छूने से कानून भी कतराता था।
चमत्कार का मायाजाल और गायब होते लोग
त्रिकाल बाबा उर्फ तुलसीराम, दस साल पहले एक मामूली जेब कतरा था। लेकिन उसने जल्द ही समझ लिया था कि इस देश में अंधविश्वास का धंधा सबसे ज्यादा मुनाफा देता है। उसने अपनी दाढ़ी बढ़ाई, भगवा चोला पहना और हाथ की सफाई को ‘चमत्कार’ का नाम देकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया।
हवा से भभूत निकालना, पानी में आग लगाना और बीमारियां ठीक करने का दावा करना—बाबा के ये नुस्खे सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। देखते ही देखते उसका एक छोटा सा डेरा भव्य आश्रम में बदल गया। लेकिन इस भव्यता के पीछे एक खौफनाक हकीकत छिप रही थी।
पिछले दो सालों में शहर के तीन बड़े उद्योगपति अचानक लापता हो गए थे। खास बात यह थी कि गायब होने से ठीक पहले, उन सभी ने अपनी करोड़ों की संपत्ति बाबा के ट्रस्ट के नाम कर दी थी। पुलिस के पास कोई सबूत नहीं था, क्योंकि कागजात पर उद्योगपतियों के दस्तखत असली थे।
तहखाने का राज और अफीम की खेती
आकाश को इस केस की कमान तब सौंपी गई जब एक युवा पत्रकार, जो बाबा के आश्रम पर स्टिंग ऑपरेशन कर रहा था, रहस्यमयी तरीके से मृत पाया गया। उसकी मौत को ‘हार्ट अटैक’ बताया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक दुर्लभ जहर की बात सामने आई थी।
आकाश समझ गए थे कि बाबा को पकड़ने के लिए आश्रम के चक्रव्यूह को अंदर से तोड़ना होगा। वह एक अमीर लेकिन दुखी व्यापारी का नाटक रचकर बाबा के सबसे करीबी शिष्यों के ग्रुप में शामिल हो गए। दो हफ्तों की कड़ी मशक्कत के बाद, उन्हें आश्रम के पीछे वाले हिस्से का सच पता चला।
सस्पेंस का मोड़: आश्रम के पीछे करीब पचास एकड़ की जमीन पर जड़ी-बूटियों के नाम पर अफीम की अवैध खेती की जा रही थी। इतना ही नहीं, बाबा के नाम पर आने वाले विदेशी चंदे (Donations) का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी के लिए किया जा रहा था। बाबा सिर्फ एक ढोंगी नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल सिंडिकेट का सरगना था।
आस्था की आड़ में ब्लैकमेलिंग का खेल
तफ्तीश के दौरान आकाश के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे जिसने उनके होश उड़ा दिए। बाबा सिर्फ पैसे नहीं ऐंठ रहा था, बल्कि वह आश्रम आने वाले रसूखदार नेताओं, डॉक्टरों और अफसरों की कमजोरियों का फायदा उठाता था।
आश्रम के ‘ध्यान कक्ष’ में गुप्त कैमरे लगे हुए थे। वहां आने वाले वीआईपी (VIP) मेहमानों की निजी पलों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती थी। इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का असली खेल। इसी डर की वजह से आज तक किसी बड़े अफसर ने बाबा के खिलाफ उंगली उठाने की हिम्मत नहीं की थी।
“अमित, यह इंसान धर्म के नाम पर पूरे सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहा है। अगर इसे आज नहीं रोका गया, तो यह अपना एक अलग समानांतर कानून बना लेगा,” आकाश ने अपनी टीम से कहा।
वह आखिरी रात और बाबा का चक्रव्यूह
गुरु पूर्णिमा की रात को बाबा का सबसे बड़ा दरबार लगा था। लाखों की भीड़ उमड़ी थी। आकाश को खबर मिली थी कि आज रात ही विदेशों से आए हथियारों की एक बड़ी खेप आश्रम के रास्ते कहीं और भेजी जानी है। यही सही मौका था बाबा को रंगे हाथों दबोचने का।
रात के ठीक बारह बजे, जब पूरा आश्रम भजनों की गूंज में डूबा था, आकाश चुपके से वीआईपी ब्लॉक की तरफ बढ़े। उन्होंने देखा कि बाबा अपने चार गुर्गों के साथ तहखाने की तरफ जा रहा था। आकाश भी परछाई की तरह उनके पीछे हो लिए।
तहखाना खुला, तो वहां का नजारा देखकर आकाश दंग रह गए। वहां आधुनिक राइफलें, भारी मात्रा में ड्रग्स और नोटों से भरे सूटकेस रखे थे। बाबा अपने गुर्गों से कह रहा था, “इन मूर्खों को भभूत बांटते रहो, और हमारा यह असली साम्राज्य ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।”
क्लाइमेक्स: पाखंडी का अंत और कानून की जीत
“साम्राज्य का अंत हो चुका है, तुलसीराम!” आकाश ने अपनी पिस्तौल तानते हुए अंधेरे से बाहर कदम रखा।
बाबा के गुर्गों ने तुरंत हथियार उठाने की कोशिश की, लेकिन तभी आकाश का इशारा पाते ही पुलिस टीम ने दरवाजे तोड़ दिए और पूरे तहखाने को घेर लिया। बाबा ने अपने भक्तों की दुहाई देने की कोशिश की, “अगर मुझे कुछ हुआ, तो बाहर खड़ी जनता इस शहर को आग लगा देगी!”
आकाश मुस्कुराए और उन्होंने जेब से एक रिमोट निकाला। उन्होंने आश्रम के बड़े स्क्रीन पर, जहां बाबा के प्रवचन चल रहे थे, इस तहखाने का लाइव वीडियो प्ले करवा दिया। बाहर खड़े लाखों भक्तों ने अपनी आंखों से देखा कि जिस बाबा को वो भगवान मान रहे थे, वो ड्रग्स और बंदूकों के बीच खड़ा था।
पल भर में श्रद्धा, गुस्से में बदल गई। बाबा का वह अभेद्य किला ताश के पत्तों की तरह ढह गया। तुलसीराम और उसके साथियों को हथकड़ियां पहनाकर सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
ईश्वर के नाम पर व्यापार करने वाले चाहे जितने ऊंचे आसन पर बैठ जाएं, उनके पापों का घड़ा कानून की एक ही चोट से फूट जाता है।
