रात 3:07 बजे की वो CCTV फुटेज…

Team Maunam
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अगर मैं आपसे कहूँ कि आप अपने ही घर में अकेले नहीं हैं, तो क्या आप मानेंगे? मैंने भी नहीं माना था। जब तक कि उस रात 3:07 बजे मेरे फोन पर मोशन सेंसर का नोटिफिकेशन नहीं आया। स्क्रीन पर जो दिख रहा था, वो मेरी पत्नी नहीं थी। वो कोई और था… जो ठीक उसके पीछे खड़ा था, लेकिन हकीकत में कमरा खाली था। हाथ कांप रहे थे, गला सूख चुका था। वो साया धीरे से कैमरे की तरफ मुड़ा और उसने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया। उसका चेहरा… वो हूबहू मेरा था।

मेरा नाम आर्यन है। मैं पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और अपनी पत्नी मेघना के साथ मुंबई के एक नए अपार्टमेंट में शिफ्ट हुआ था। मेघना को ‘सोमनाम्बुलिज्म’ यानी नींद में चलने की बीमारी थी। इसी वजह से मैंने पूरे घर में हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगवाए थे, ताकि अगर रात में वो कहीं गिरे या बाहर निकलने की कोशिश करे, तो मेरे फोन पर तुरंत अलर्ट आ जाए। मुझे क्या पता था कि तकनीक का यही चमत्कार मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दुस्वप्न बन जाएगा।

आधी रात का वो नोटिफिकेशन

घटना पिछले मंगलवार की है। मैं ऑफिस के एक प्रोजेक्ट की वजह से घर से दूर पुणे में था। रात के करीब तीन बज रहे थे। अचानक मेरे फोन की वाइब्रेशन से मेरी नींद खुल गई। ‘Motion detected in Master Bedroom’—स्क्रीन पर फ्लैश हो रहा था।

मैंने झपकी तोड़ते हुए ऐप खोला। स्क्रीन पर ब्लैक एंड व्हाइट फुटेज साफ दिख रही थी। मेघना बिस्तर पर गहरी नींद में सो रही थी। खिड़की से छनकर आती हल्की रोशनी कमरे के कोनों को धुंधला कर रही थी। तभी मैंने कुछ अजीब देखा।

मेघना के बिस्तर के ठीक बगल में रखा अलमारी का दरवाजा धीरे-धीरे खुल रहा था। मेरी धड़कनें तेज हो गईं। मुझे लगा कोई चोर है। मैं चिल्लाकर उसे जगाना चाहता था, लेकिन तभी फुटेज में कुछ ऐसा उभरा जिसने मेरे खून को बर्फ जैसा ठंडा कर दिया।

अलमारी के अंधेरे से एक हाथ बाहर निकला। लंबा, पीला और हड्डियों का ढांचा जैसा। वो हाथ धीरे से मेघना के चेहरे की तरफ बढ़ा। मैंने तुरंत कमरे के स्पीकर का बटन दबाया और चिल्लाया, “मेघना! मेघना उठो! तुम्हारे पीछे कोई है!”

मेरी आवाज गूँजी, मेघना हड़बड़ाकर उठी। उसने चारों तरफ देखा, लाइट जलाई। कमरा बिल्कुल खाली था। अलमारी का दरवाजा भी बंद था।

“आर्यन? क्या हुआ? तुम क्यों चिल्ला रहे हो?” मेघना की आवाज में घबराहट थी।

मैंने कांपते हाथों से रिकॉर्डिंग दोबारा देखी। रिकॉर्डिंग में अलमारी अभी भी खुली थी और वो हाथ मेघना के बालों को सहला रहा था। लेकिन लाइव फुटेज में कमरा खाली था। इसका मतलब था कि कैमरा वो देख रहा था जो मेरी आँखों के लिए अदृश्य था।

बंद दरवाजे के पीछे का सच

अगले दिन मैं पहली फ्लाइट पकड़कर वापस घर आ गया। मेघना को लगा कि शायद मैं काम के तनाव की वजह से मतिभ्रम (hallucination) का शिकार हो रहा हूँ।

“देखो आर्यन, यहाँ कोई नहीं है। तुम खामखां डर रहे हो,” मेघना ने मुझे तसल्ली देते हुए कहा।

मैंने उस रात के फुटेज को अपने लैपटॉप पर बड़े स्क्रीन पर चलाया। जो मैंने देखा, उसने मेरे पैरों तले जमीन निकाल दी। अलमारी से निकला वो साया पूरी तरह बाहर आ चुका था। वो एक इंसान की शक्ल का था, लेकिन उसकी त्वचा राख जैसी धूसर थी। और सबसे डरावनी बात—उसकी आँखें नहीं थी, सिर्फ दो गहरे काले गड्ढे थे।

जैसे ही मेघना ने लाइट जलाई थी, वो साया गायब नहीं हुआ था। वो बस ‘अदृश्य’ हो गया था। कैमरे की फुटेज में दिख रहा था कि जब मेघना लाइट जलाकर मुझसे बात कर रही थी, वो साया ठीक उसके बगल में खड़ा होकर उसे घूर रहा था।

उसने कैमरे की ओर देखा। जैसे उसे पता हो कि मैं उसे देख रहा हूँ। उसने अपनी उंगली अपने होंठों पर रखी—’खामोश रहने का इशारा’—और फिर गायब हो गया।

उस रात मैं सो नहीं पाया। मैंने फैसला किया कि मैं पूरी रात जागकर मॉनिटर पर नजर रखूँगा। मैंने अपने हाथ में एक छोटी चाक़ू रख ली, हालांकि मुझे पता था कि परछाइयों से लड़ने में हथियार किसी काम के नहीं होते।

मौत की आहट

रात के 2:45 बजे। मेघना सो रही थी। मैं बगल के कमरे में लैपटॉप की स्क्रीन से चिपका हुआ था। कैमरा नंबर 1 (लिविंग रूम), कैमरा नंबर 2 (किचन), कैमरा नंबर 3 (बेडरूम)।

सब कुछ शांत था। तभी कैमरा नंबर 2 की स्क्रीन झिलमिलाई (flicker)। किचन के नल से पानी टपकने लगा। मैंने गौर किया, कैमरे में फर्श पर गीले पैरों के निशान बन रहे थे, लेकिन पैर नजर नहीं आ रहे थे। वो निशान धीरे-धीरे मास्टर बेडरूम की तरफ बढ़ रहे थे।

मैंने तुरंत अपना फोन उठाया और बेडरूम की ओर भागा। जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, मैंने देखा मेघना खिड़की पर खड़ी थी। वह नींद में थी। उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन वो सातवीं मंजिल की खिड़की की मुंडेर पर चढ़ रही थी।

“मेघना! रुको!” मैं चिल्लाया और उसे पीछे खींचने के लिए झपटा।

जैसे ही मैंने उसे छुआ, मुझे एक ज़ोरदार झटका लगा। ऐसा लगा जैसे मैंने बर्फ की किसी दीवार को छू लिया हो। मेघना की आँखें खुलीं, लेकिन वो मेघना नहीं थी। उसकी पुतलियां पूरी तरह गायब थीं।

उसने एक ऐसी आवाज़ में बात की जो उसकी थी ही नहीं, “तुमने देख लिया ना आर्यन? कैमरे सच बोलते हैं… पर तुम सच बर्दाश्त नहीं कर पाओगे।”

उसने मुझे धक्का दिया और मैं पीछे जा गिरा। मेरा फोन फर्श पर गिरा और उसका कैमरा ऐप अभी भी ऑन था। मैंने स्क्रीन की तरफ देखा। स्क्रीन पर जो नज़ारा था, उसने मेरी रूह कंपा दी।

मेरे पीछे वो ‘दूसरा मैं’ खड़ा था। वही साया जो उस रात अलमारी से निकला था, अब हूबहू मेरा रूप ले चुका था। वो स्क्रीन में मेघना का गला दबा रहा था, जबकि हकीकत में मेघना खिड़की के पास बेसुध खड़ी थी।

असली सच और आखिरी रात

मुझे समझ आया कि वो साया सिर्फ एक प्रेत नहीं था। वो एक ‘डॉपलगैंगर’ (Doppelgänger) था—एक ऐसा दुष्ट साया जो किसी की पहचान चुरा लेता है। वो धीरे-धीरे मेरी जगह ले रहा था। सीसीटीवी कैमरा उसकी पहली और आखिरी गलती थी, क्योंकि डिजिटल लेंस उस परत को देख पा रहे थे जो इंसानी आँखें नहीं देख सकतीं।

मैंने हिम्मत जुटाई और बेडरूम में रखे उस पुराने कैमरे को उखाड़ दिया। जैसे ही कैमरा टूटा, एक तेज चीख गूँजी। पूरे घर की लाइटें बंद हो गईं।

अंधेरे में मुझे किसी के सांस लेने की आवाज आ रही थी। ठीक मेरे कान के पास।

“तुम इसे रोक नहीं सकते आर्यन। मैं अब तुम्हारे अंदर हूँ।”

मैंने घबराकर लाइट जलाई। मेघना फर्श पर बेहोश पड़ी थी। साया कहीं नहीं था। मैंने राहत की सांस ली और उसे उठाने के लिए बढ़ा। तभी मेरी नज़र दीवार पर लगे एक छोटे से शीशे पर पड़ी।

शीशे में मेरा अक्स नहीं था।

मैं पागलों की तरह अपने फोन की तरफ भागा। मैंने फ्रंट कैमरा ऑन किया। स्क्रीन पर मेरा चेहरा नहीं, बल्कि उस बिना आँखों वाले राक्षस का चेहरा था।

मैं चिल्लाना चाहता था, लेकिन मेरे गले से आवाज नहीं निकली। मैं खुद को देख रहा था, लेकिन मैं खुद नहीं था। मैं अब कैमरे के अंदर कैद था, और वो ‘दूसरा आर्यन’ बाहर खड़ा होकर मुस्कुरा रहा था।

उसने मेघना को गोद में उठाया और बड़ी कोमलता से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसने फोन उठाया, कैमरे की ओर देखा और ‘डिलीट ऑल रिकॉर्डिंग्स’ पर क्लिक कर दिया।

आज तीन महीने बीत चुके हैं। दुनिया के लिए मैं आर्यन हूँ। मैं ऑफिस जाता हूँ, मेघना से प्यार करता हूँ, दोस्तों से मिलता हूँ। लेकिन हर रात, जब घर के सीसीटीवी कैमरे सक्रिय होते हैं, मैं उस काली स्क्रीन के पीछे छिपकर रोता हूँ। मेघना को लगता है कि उसकी नींद में चलने की बीमारी ठीक हो गई है, उसे क्या पता कि उसके बगल में जो सो रहा है, वो उसका पति नहीं बल्कि वो साया है जो उस रात कैमरे में दिखा था।

अगर आपके घर में भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो एक बार उनकी फुटेज ध्यान से देखिएगा। कहीं कोई ऐसा तो नहीं जो आपके पीछे खड़ा होकर आपकी आँखों के बंद होने का इंतज़ार कर रहा हो? शायद वो आपकी जगह लेने के लिए बस एक सही पल की तलाश में है।

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