रात के दो बज रहे थे। सन्नाटा इतना गहरा था कि कमरे में रखी घड़ी की टिक-टिक भी किसी के हथौड़े मारने जैसी महसूस हो रही थी। आर्यन अपनी खिड़की के पास बैठा बाहर घने अंधेरे को देख रहा था। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे थे और दिल में एक ऐसा ज़ख्म, जो शायद कभी नहीं भरने वाला था।
ठीक तीन दिन पहले, उसने अपनी पत्नी सिया को अपने हाथों से ज़मीन के छह फीट नीचे दफन किया था। एक कार एक्सीडेंट ने उसकी दुनिया उजाड़ दी थी। सिया का वो मुस्कुराता चेहरा अब बस तस्वीरों में कैद था।
आर्यन ने अपनी कांपती उंगलियों से मेज पर रखा सिया का फोन उठाया। वह स्विच ऑफ था। उसने उसे चार्ज पर लगाया और जैसे ही ऑन किया, कमरे का तापमान अचानक गिर गया। आर्यन को महसूस हुआ जैसे कोई उसके ठीक पीछे खड़ा होकर उसकी गर्दन पर ठंडी सांसें छोड़ रहा है। उसने पीछे मुड़कर देखा, पर वहां कोई नहीं था। सिर्फ दीवार पर टंगी सिया की तस्वीर उसे देख रही थी।
अभी उसने फोन मेज पर रखा ही था कि अचानक सन्नाटे को चीरते हुए फोन की रिंगटोन बज उठी। आर्यन का दिल ज़ोर से धड़का। स्क्रीन पर जो नाम चमक रहा था, उसे देखकर उसके हाथ से पानी का गिलास छूटकर फर्श पर चकनाचूर हो गया।
स्क्रीन पर लिखा था— “My Life (Sia) Calling…”
मौत के तीन दिन बाद
आर्यन के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। वह सोचने लगा कि क्या यह कोई भद्दा मज़ाक है? सिया का फोन तो उसके हाथ में था, फिर कॉल कहाँ से आ रही थी? उसने कांपते हाथों से कॉल रिसीव की और फोन कान से लगाया।
दूसरी तरफ सिर्फ सन्नाटा था… और फिर एक बहुत ही धीमी, घरघराहट भरी आवाज़ आई।
“आर्यन… बचाओ… यहाँ बहुत अंधेरा है…”
आर्यन की चीख गले में ही फंस गई। वह आवाज़ सिया की ही थी, लेकिन उसमें वो पहले जैसी खनक नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत दूर से, मिट्टी के नीचे से बोल रहा हो।
“सिया? सिया तुम कहाँ हो? यह क्या मज़ाक है?” आर्यन पागलों की तरह चिल्लाया।
“बहुत ठंडा है यहाँ आर्यन… मिट्टी मेरी आँखों में जा रही है… मुझे निकालो… प्लीज…”
कॉल कट गई। आर्यन पसीने से तर-बतर था। उसका दिमाग कह रहा था कि यह नामुमकिन है, लेकिन उसका दिल चीख रहा था कि उसकी सिया मुसीबत में है। उसने तुरंत गाड़ी की चाबी उठाई और उसी वक्त कब्रिस्तान की तरफ भागा। बाहर मूसलाधार बारिश शुरू हो चुकी थी, जैसे आसमान भी उस आने वाले खौफ पर रो रहा हो।
कब्रिस्तान का सन्नाटा
कब्रिस्तान के गेट पर ताला लटका था, लेकिन आर्यन को किसी की परवाह नहीं थी। वह दीवार फांदकर अंदर कूदा। चारों तरफ पुरानी कब्रें और गीली मिट्टी की सोंधी महक थी, जो उस रात बहुत डरावनी लग रही थी।
वह भागता हुआ सिया की कब्र के पास पहुँचा। वहां ताजी मिट्टी अभी भी वैसी ही थी। उसने घुटनों के बल बैठकर मिट्टी को अपने हाथों से कुरेदना शुरू किया।
“सिया! मैं आ गया हूँ!” वह पागलों की तरह चिल्ला रहा था।
तभी उसका फोन फिर से बजा। वही नंबर। वही नाम।
उसने फोन उठाया, “सिया! मैं तुम्हारी कब्र के पास ही हूँ!”
“पीछे देखो आर्यन…” फोन से आवाज़ आई।
आर्यन का शरीर पत्थर का हो गया। उसने धीरे से सिर घुमाया। कुछ ही मीटर की दूरी पर, एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे, सफेद कपड़ों में कोई खड़ा था। बारिश की वजह से चेहरा साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन वह कद-काठी सिया जैसी ही थी।
वह साया धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। जैसे-जैसे वह पास आया, आर्यन की आँखों में खौफ और आंसू एक साथ भर आए। वह सिया ही थी, लेकिन उसके कपड़े फटे हुए थे, चेहरे पर मिट्टी लगी थी और उसकी आँखें… उसकी आँखों में सिर्फ सफेद पुतलियां थीं।
दफन राज़ का खुलासा
“सिया… तुम जीवित हो?” आर्यन ने लड़खड़ाती आवाज़ में पूछा।
सिया का वो साया उसके पास आकर रुक गया। उसके चेहरे पर एक अजीब सी, डरावनी मुस्कान थी। उसने अपना हाथ आर्यन की तरफ बढ़ाया। उसके नाखून काले पड़ चुके थे।
“तुमने मुझे बहुत जल्दी दफना दिया आर्यन…” उसने फुसफुसाकर कहा।
आर्यन को याद आया कि एक्सीडेंट के बाद डॉक्टरों ने सिया को ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया था। क्या उसने कोई गलती कर दी थी? क्या सिया उस वक्त ज़िंदा थी जब उसे दफनाया गया?
“मुझे माफ कर दो सिया! मुझे लगा तुम…” आर्यन फूट-फूट कर रोने लगा।
तभी सिया का हाथ आर्यन के गले तक पहुँचा। उसकी छुअन बर्फ जैसी ठंडी थी। उसने आर्यन का गला धीरे से दबाना शुरू किया।
“यहाँ बहुत अकेलापन है आर्यन… कब्र में जगह बहुत कम है, पर हम दोनों वहां समा सकते हैं।”
आर्यन का दम घुटने लगा। वह तड़प रहा था, लेकिन सिया की ताकत किसी इंसानी ताकत से कहीं ज्यादा थी। तभी अचानक आर्यन की नज़र नीचे गिरी मिट्टी पर पड़ी। सिया की कब्र के ऊपर का हिस्सा अभी भी वैसा ही था, मिट्टी हिली तक नहीं थी। अगर सिया बाहर आती, तो मिट्टी बिखरी होती।
उसने हिम्मत जुटाई और अपनी जेब से मोबाइल निकाला। फ्लैशलाइट जलाई और सीधे उस साये की आँखों पर मारी। साया एक पल के लिए पीछे हटा और चीखा। वह आवाज़ किसी औरत की नहीं, बल्कि कई आत्माओं के एक साथ चिल्लाने जैसी थी।
मौत की आहट
जैसे ही रोशनी उस साये पर पड़ी, उसका चेहरा बदलने लगा। वह सिया नहीं थी। वह कुछ और ही था—कोई पुरानी रूह जो कब्रों के बीच भटकती थी और अपनों के गम में डूबे लोगों को अपना शिकार बनाती थी।
आर्यन पीछे हटा और भागने की कोशिश की, लेकिन उसका पैर एक गड्ढे में फंस गया। वह ज़मीन पर गिरा और उसका फोन हाथ से दूर जा गिरा।
अंधेरे में वह साया फिर से उसकी तरफ बढ़ने लगा।
“तुमने उसे खो दिया आर्यन… अब तुम्हारी बारी है।”
तभी, अचानक सन्नाटे में एक और आवाज़ गूंजी। इस बार यह आवाज़ फोन से नहीं, बल्कि ज़मीन के नीचे से आ रही थी।
“आर्यन… भागो! यहाँ से भागो!”
यह आवाज़ असली सिया की थी। यह साफ़ थी, कोमल थी और उसमें आर्यन के लिए वही पुराना प्यार था।
उस साये ने जैसे ही ज़मीन के नीचे से आती आवाज़ सुनी, वह ठिठक गया। कब्रिस्तान की हवाएं अचानक तेज़ हो गईं। पेड़ों की टहनियां आपस में टकराकर डरावनी आवाज़ें निकालने लगीं। आर्यन ने देखा कि सिया की कब्र के पास से एक नीली रोशनी निकल रही थी।
वह रोशनी उस काली परछाईं से टकराई और उसे पीछे धकेलने लगी। आर्यन को लगा जैसे कोई उसे ज़मीन से ऊपर उठा रहा है। उसने अपनी पूरी ताकत लगाई और वहां से भागा। वह तब तक नहीं रुका जब तक वह अपने घर के अंदर नहीं पहुँच गया और दरवाज़ा लॉक नहीं कर लिया।
आखिरी कॉल
आर्यन अपने कमरे में बैठकर हांफ रहा था। वह पसीने और कीचड़ में लथपथ था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि जो उसने देखा वह सच था या उसका भ्रम।
तभी, मेज पर रखा सिया का फोन फिर से जला।
आर्यन की हिम्मत नहीं थी उसे उठाने की, लेकिन इस बार कोई रिंगटोन नहीं बजी। सिर्फ एक मैसेज आया था।
उसने कांपते हाथों से फोन उठाया और मैसेज खोला।
मैसेज सिया के नंबर से ही था:
“अब तुम सुरक्षित हो आर्यन। वह मैं नहीं थी। मैं हमेशा तुम्हारे पास रहूँगी, लेकिन अब दोबारा यहाँ मत आना। अपनी ज़िंदगी जियो। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी… पर अभी नहीं। आई लव यू।”
आर्यन की आँखों से आंसू बहने लगे। उसने फोन को अपने सीने से लगा लिया।
अगली सुबह जब वह सोकर उठा, तो उसने सिया के फोन को देखा। फोन की बैटरी 0% थी और वह पूरी तरह डिस्चार्ज था। आर्यन ने जब कॉल लॉग्स चेक किए, तो वहां पिछले 24 घंटों में कोई भी कॉल या मैसेज नहीं था।
वह हैरान रह गया। क्या वह सब सिर्फ एक सपना था?
उसने कमरे के कोने में नज़र दौड़ाई। वहां ज़मीन पर कब्रिस्तान की गीली मिट्टी के जूतों के निशान अभी भी मौजूद थे। और उसके हाथ पर नीले रंग के पांच उंगलियों के निशान थे—जैसे किसी ने उसका गला दबाने की कोशिश की हो।
आर्यन समझ गया कि कुछ चीज़ें विज्ञान की समझ से परे होती हैं। सिया चली गई थी, लेकिन उसने मरने के बाद भी उसे बचा लिया था।
आज भी, कभी-कभी रात के 2:14 बजे आर्यन के फोन की स्क्रीन अपने आप जल उठती है। वह कोई कॉल नहीं करता, कोई मैसेज नहीं भेजता। वह बस मुस्कुरा देता है, क्योंकि उसे पता है कि सरहद के उस पार कोई है जो आज भी उसका ख्याल रख रहा है।
लेकिन उस रात के बाद से, उसने कभी कब्रिस्तान की तरफ मुड़कर नहीं देखा। क्योंकि उसे पता था कि वहां सिर्फ सिया की यादें नहीं हैं… वहां कुछ और भी है जो आज भी किसी की पुकार का इंतज़ार कर रहा है।
