गांव के उस छोटे से घर में, खिड़की के पास एक पुरानी कुर्सी थी…
और उस कुर्सी पर हर शाम बैठता था वो लड़का — आरव।
आरव की जिंदगी बहुत साधारण थी…
ना कोई बड़ी ख्वाहिश, ना कोई बड़ा सपना।
बस एक ही चीज़ थी… जिसका वो हर दिन इंतज़ार करता था — रिया।
रिया…
जिसे उसने पहली बार स्कूल के दिनों में देखा था।
वो हंसी, वो आंखें… जैसे किसी ने वक्त को वहीं रोक दिया हो।
दोनों दोस्त बने… फिर धीरे-धीरे,
आरव के दिल में कुछ और ही जन्म लेने लगा।
लेकिन उसने कभी कहा नहीं।
डर था… कहीं दोस्ती भी खो ना दे।
⏳ समय बीतता गया…
स्कूल खत्म हुआ, कॉलेज आया…
और एक दिन, रिया ने मुस्कुराते हुए कहा —
“आरव, मेरी शादी तय हो गई है…”
उस दिन आरव ने सिर्फ मुस्कुराकर कहा —
“तू खुश है ना… बस वही काफी है।”
पर उस मुस्कान के पीछे,
एक पूरी दुनिया टूट चुकी थी।
💔 उसके बाद…
रिया चली गई…
अपने नए जीवन में, नई खुशियों के साथ।
और आरव…
वो वहीं रह गया… उसी खिड़की, उसी कुर्सी के साथ।
हर शाम वो बैठता…
और सोचता —
“शायद एक दिन वो वापस आएगी…”
लोग कहते —
“पागल हो गया है ये लड़का…”
“अब कोई नहीं आएगा…”
लेकिन आरव को यकीन था —
“सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता…”
⏳ साल गुजरते गए…
घर पुराना हो गया…
बाल सफेद हो गए…
आंखों की चमक भी धीरे-धीरे धुंधली पड़ गई…
पर एक चीज़ नहीं बदली —
उसका इंतज़ार।
एक दिन…
दरवाज़े पर दस्तक हुई।
आरव धीरे-धीरे उठा…
दिल तेज़ धड़क रहा था…
दरवाज़ा खोला…
सामने एक औरत खड़ी थी…
चेहरे पर उम्र की लकीरें…
पर आंखें… वही थीं।
“रिया…?”
रिया की आंखों में आंसू थे।
“मैं वापस आ गई, आरव…”
उस पल…
समय जैसे फिर से रुक गया।
आरव मुस्कुराया…
वो मुस्कान, जिसका वो सालों से इंतज़ार कर रहा था।
लेकिन…
अगले ही पल…
उसका शरीर धीरे-धीरे जमीन पर गिर गया।
रिया चिल्लाई —
“आरव!!”
पर शायद…
वो सिर्फ इस पल का इंतज़ार कर रहा था।
💔 कहानी का सच…
कुछ लोग जिंदगी में पाने के लिए नहीं…
बल्कि इंतज़ार करने के लिए पैदा होते हैं।
और आरव…
वो उन्हीं में से एक था।
