शाम का वक्त था। हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। आदित्य अपने फोन को बार-बार देख रहा था… जैसे किसी खास मैसेज का इंतज़ार हो।
आज वो पहली बार रिया से मिलने वाला था।
दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई थी। शुरू में बस “हाय-हेलो” से बात शुरू हुई, लेकिन धीरे-धीरे बातें इतनी गहरी हो गईं कि दोनों एक-दूसरे के बिना दिन अधूरा लगने लगा।
रिया की बातें… उसका हँसना… उसकी सादगी… सब कुछ आदित्य को खास लगता था।
लेकिन आज… आज कुछ अलग था।
रिया का आखिरी मैसेज सुबह आया था—
“शाम 6 बजे, सिटी पार्क में मिलते हैं…”
आदित्य ठीक 5:45 पर ही पार्क पहुंच गया। दिल तेज़ धड़क रहा था… जैसे कोई सपना सच होने वाला हो।
6 बजे…
6:10…
6:30…
रिया नहीं आई।
उसने कॉल किया… फोन स्विच ऑफ।
मैसेज किया… कोई जवाब नहीं।
थोड़ी देर बाद उसके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।
“हेलो… क्या आप आदित्य बोल रहे हैं?”
“जी… कौन?”
“मैं सिटी हॉस्पिटल से बोल रहा हूँ… रिया नाम की एक लड़की का एक्सीडेंट हो गया है… उसके फोन में आपका नंबर मिला…”
आदित्य के हाथ कांपने लगे।
वो तुरंत अस्पताल भागा।
अस्पताल के उस सफेद कमरे में… रिया शांत पड़ी थी। जैसे सो रही हो… लेकिन इस बार वो कभी नहीं उठने वाली थी।
डॉक्टर ने धीरे से कहा—
“हमें अफसोस है… हम उसे बचा नहीं पाए…”
आदित्य की आंखों से आंसू बहने लगे। वो वहीं बैठ गया… रिया का हाथ पकड़कर।
उसके फोन में एक आखिरी मैसेज था… जो शायद भेजा नहीं जा सका—
“आदित्य… मैं रास्ते में हूँ… आज तुम्हें देखकर बहुत कुछ कहना है… शायद ये पहली और सबसे खूबसूरत मुलाकात होगी…”
लेकिन वो मुलाकात कभी हो ही नहीं पाई…
एक प्यार… जो शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया।
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है… जहां हम सिर्फ सोचते रह जाते हैं—
“काश… एक बार मिल लेते…”
