बारिश की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की पर गिर रही थीं…
रिया अपनी डायरी के पन्ने पलट रही थी। हर पन्ने पर एक ही नाम था—आदित्य।
लेकिन अजीब बात ये थी कि…
रिया को आदित्य सिर्फ सपनों में मिलता था।
⏳ टाइमलाइन 1 – साल 2026
रिया एक ग्राफिक डिजाइनर थी। उसकी जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी—काम, घर, और अकेलापन।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से…
उसे हर रात एक ही सपना आता था।
एक लड़का…
ट्रेन में बैठा… खिड़की के पास…
और उसे देखकर मुस्कुरा रहा था।
“तुम देर से आई…” वो हर बार कहता।
रिया हैरान होती—
ये कौन है? और मुझे पहचानता कैसे है?
⏳ टाइमलाइन 2 – साल 2006
आदित्य… एक कॉलेज स्टूडेंट…
हर दिन एक लड़की को अपने सपनों में देखता था।
लंबे बाल… हल्की मुस्कान…
और उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी।
“तुम कब आओगी?” आदित्य हर रात पूछता।
उसे लगता था…
वो लड़की कहीं न कहीं वास्तव में मौजूद है।
एक दिन रिया अपने पुराने घर की सफाई कर रही थी।
तभी उसे एक पुरानी डायरी मिली…
डायरी पर लिखा था—
“Aditya – 2006”
रिया का दिल जोर से धड़कने लगा…
उसने डायरी खोली—
पहले ही पन्ने पर लिखा था:
“मैं हर रात एक लड़की को देखता हूँ…
शायद वो भविष्य से है…”
रिया के हाथ कांपने लगे…
रिया ने आगे पढ़ा—
“अगर तुम ये पढ़ रही हो…
तो शायद मैं अब इस दुनिया में नहीं हूँ…
मेरा एक्सीडेंट 15 जुलाई 2006 को होने वाला है…”
रिया की आँखों से आँसू गिरने लगे…
मतलब… वो लड़का… आदित्य…
20 साल पहले मर चुका था।
उस रात…
रिया को फिर वही सपना आया।
इस बार आदित्य उदास था।
“अब तुम जान गई…” उसने धीरे से कहा।
रिया रोते हुए बोली—
“मैं तुम्हें बचा सकती हूँ… मैं कुछ कर सकती हूँ ना?”
आदित्य मुस्कुराया—
“कुछ कहानियाँ बदलने के लिए नहीं होतीं…
बस महसूस करने के लिए होती हैं…”
अगली सुबह…
रिया ने डायरी का आखिरी पन्ना पढ़ा—
“अगर तुम मुझे ढूंढने आओ…
तो शायद हम किसी और टाइमलाइन में मिल सकें…”
रिया ने खिड़की से बाहर देखा…
बारिश अब भी हो रही थी…
लेकिन इस बार…
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी।
