बारिश की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं। अस्पताल के उस कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था। रिया बिस्तर पर बैठी थी… आंखें खुली थीं, लेकिन उनमें कोई पहचान नहीं थी।
“रिया… मुझे पहचानती हो?”
अमन ने कांपती आवाज़ में पूछा।
रिया ने उसकी तरफ देखा… कुछ पल के लिए जैसे वो उसे समझने की कोशिश कर रही हो… फिर धीरे से सिर हिला दिया —
“नहीं…”
उस एक शब्द ने अमन की दुनिया तोड़ दी।
दो साल पहले…
रिया और अमन की मुलाकात एक कॉलेज फेस्ट में हुई थी।
पहली नजर में प्यार जैसा कुछ नहीं था… लेकिन धीरे-धीरे दोस्ती हुई, और वही दोस्ती कब प्यार में बदल गई, उन्हें खुद भी नहीं पता चला।
रिया की हंसी, उसकी बातें… अमन की दुनिया बस उसी के इर्द-गिर्द घूमने लगी थी।
और रिया?
वो तो अमन के बिना एक दिन भी नहीं रह पाती थी।
“अगर मैं तुम्हें कभी भूल गई तो?”
रिया ने एक दिन मजाक में पूछा था।
अमन हंस पड़ा —
“तो मैं फिर से तुम्हें मुझसे प्यार करवाऊंगा…”
लेकिन किस्मत को शायद ये मजाक पसंद नहीं आया…
एक दिन ऑफिस से लौटते वक्त रिया का एक्सीडेंट हो गया।
सिर पर गहरी चोट लगी… और जब होश आया…
तो उसकी यादों का एक हिस्सा हमेशा के लिए खो चुका था।
वो हिस्सा… जिसमें अमन था।
अमन हर दिन अस्पताल आता।
उससे बातें करता… पुरानी यादें सुनाता…
“याद है, तुमको बारिश कितनी पसंद है?”
“तुम हमेशा चाय में ज्यादा शक्कर डालती थीं…”
रिया बस सुनती रहती…
जैसे वो किसी अजनबी की कहानी सुन रही हो।
दिन बीतते गए…
एक दिन अमन ने हिम्मत करके पूछा —
“क्या… क्या हम फिर से दोस्त बन सकते हैं?”
रिया हल्का सा मुस्कुराई —
“शायद… लेकिन मुझे टाइम लगेगा…”
अब उनकी कहानी फिर से शुरू हो रही थी…
लेकिन इस बार सब कुछ नया था।
अमन फिर से उसे जान रहा था…
और रिया… बिना जाने उसी इंसान की तरफ खिंच रही थी, जिससे वो पहले ही प्यार कर चुकी थी।
एक शाम…
बारिश हो रही थी।
रिया खिड़की के पास खड़ी थी…
अमन ने धीरे से कहा —
“चलो, चाय पीने चलते हैं…”
रिया ने उसकी तरफ देखा… और अचानक उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आई —
“पता नहीं क्यों… लेकिन तुम्हारे साथ अच्छा लगता है…”
अमन की आंखों में आंसू आ गए…
लेकिन इस बार ये दर्द के नहीं… उम्मीद के थे।
शायद प्यार यादों से नहीं…
दिल से होता है।
और अगर दिल में सच्चाई हो…
तो प्यार दोबारा भी हो सकता है।
