बोलने वाला तोता

Team Maunam
Disclosure: This website may contain affiliate links, which means I may earn a commission if you click on the link and make a purchase. I only recommend products or services that I personally use and believe will add value to my readers. Your support is appreciated!

नीलपुर नाम का एक छोटा सा गाँव था, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता था। चारों ओर घने जंगल, कल-कल बहती नदियाँ और ऊँचे पहाड़ इस गाँव को किसी स्वर्ग जैसा अहसास कराते थे। इसी गाँव में दस साल का एक बालक रहता था जिसका नाम आर्यन था। आर्यन एक बेहद प्यारा और संवेदनशील बच्चा था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह बोलते समय हकलाता था। इस कारण गाँव के अन्य बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते थे और उसे अपने साथ खेलने नहीं देते थे। आर्यन अक्सर अकेला रहता और प्रकृति के साथ अपना समय बिताता।

एक दिन, जब आर्यन स्कूल से लौट रहा था, उसने पुराने बरगद के पेड़ के पास एक अजीब सी आवाज़ सुनी। वह धीरे-धीरे उस आवाज़ की ओर बढ़ा। वहाँ उसने देखा कि एक सुंदर, चटख हरे रंग का तोता ज़मीन पर गिरा हुआ था। उसकी लाल चोंच थोड़ी चोटिल थी और उसके पंख फड़फड़ा रहे थे। ऐसा लग रहा था कि किसी बाज़ ने उस पर हमला किया था। आर्यन का दिल पसीज गया। उसने बड़ी कोमलता से उस तोते को अपने हाथों में उठाया और अपने घर ले आया।

आर्यन ने तोते के घावों को साफ़ किया, उसे पानी पिलाया और थोड़े दाने खिलाए। वह घंटों उसके पास बैठा रहता और उसे सहलाता। उसने उस तोते का नाम ‘मिट्ठू’ रखा। कुछ ही दिनों में मिट्ठू ठीक हो गया। आर्यन जब भी अकेला होता, वह मिट्ठू से अपने मन की बातें करता। उसे पता था कि मिट्ठू बोल नहीं सकता, लेकिन उसे लगता था कि मिट्ठू उसकी हर बात समझता है। आर्यन कहता, “मि-मि-मिट्ठू, क्या त-त-तुम मेरे दोस्त ब-ब-बनोगे?”

एक शाम जब आर्यन मिट्ठू को दाना खिला रहा था, अचानक एक चमत्कार हुआ। मिट्ठू ने अपना सिर हिलाया और साफ़ आवाज़ में बोला, “आर्यन, मैं तुम्हारा दोस्त ही हूँ और हमेशा रहूँगा।” आर्यन अपनी जगह से उछल पड़ा। उसे अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हुआ। उसने हकलाते हुए पूछा, “त-त-तुम बोल सकते हो?” मिट्ठू ने जवाब दिया, “हाँ आर्यन, मैं बोल सकता हूँ। मैं साधारण तोता नहीं हूँ। मैं ज्ञान के वन से आया हूँ। मैं केवल उन्हीं से बात करता हूँ जिनका दिल सोने जैसा खरा होता है।”

आर्यन की खुशी का ठिकाना न रहा। अब उसका अकेलापन दूर हो गया था। वह और मिट्ठू रोज़ घंटों बातें करते। मिट्ठू उसे साहस, प्रेम और दुनिया की अद्भुत कहानियाँ सुनाता। उसने आर्यन को सिखाया कि हकलाना कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि शब्दों का सम्मान करना है। मिट्ठू कहता, “आर्यन, जब तुम रुकते हो, तो तुम शब्दों को और अधिक गहराई से महसूस करते हो। डरो मत, अपनी आवाज़ को अपनी ताकत बनाओ।”

जल्द ही पूरे गाँव में यह खबर फैल गई कि आर्यन के पास एक ‘बोलने वाला तोता’ है। लोग उसे देखने के लिए आने लगे। लेकिन मिट्ठू सबके सामने नहीं बोलता था। वह केवल आर्यन से ही बात करता। गाँव में एक लालची शिकारी रहता था, जिसका नाम जग्गा था। जब उसने इस जादुई तोते के बारे में सुना, तो उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि अगर वह इस तोते को पकड़ ले और शहर के बड़े सेठ को बेच दे, तो उसे बहुत सारे पैसे मिलेंगे।

एक रात, जब पूरा गाँव सो रहा था, जग्गा चुपके से आर्यन के घर के पीछे वाले बरामदे में घुसा जहाँ मिट्ठू का पिंजरा रखा था। उसने पिंजरे पर एक काला कपड़ा डाला और मिट्ठू को चुराकर ले गया। सुबह जब आर्यन उठा और उसने मिट्ठू को गायब पाया, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। उसने पूरे गाँव में मिट्ठू को ढूँढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिला।

आर्यन को शक हुआ कि यह काम जग्गा शिकारी का ही हो सकता है, क्योंकि वह अक्सर जानवरों को पकड़कर शहर ले जाता था। आर्यन ने तय किया कि वह अपने दोस्त को बचाएगा। वह अकेला ही जंगल के रास्ते शहर की ओर निकल पड़ा। उसे डर लग रहा था, रात होने वाली थी, लेकिन मिट्ठू के प्रति उसके प्रेम ने उसे असीम साहस दिया। चलते-चलते उसे जग्गा का तंबू दिखाई दिया। वह एक पेड़ के पीछे छिप गया।

जग्गा वहाँ बैठा शराब पी रहा था और मिट्ठू एक लोहे के पिंजरे में कैद था। जग्गा कह रहा था, “बोल ऐ पंछी! कुछ बोल! अगर तू शहर के सेठ के सामने बोलेगा, तो मुझे मालामाल कर देगा।” लेकिन मिट्ठू शांत था। उसने एक शब्द भी नहीं कहा। जग्गा गुस्से में पिंजरे को हिलाने लगा। यह देखकर आर्यन से रहा नहीं गया। वह झाड़ियों से बाहर निकल आया और चिल्लाया, “उ-उ-उसे छोड़ दो! वह मे-मे-मेरा दोस्त है!”

जग्गा हँसने लगा, “अरे ओ हकलाने वाले लड़के! तू यहाँ क्या कर रहा है? भाग जा यहाँ से, वरना तुझे भी पिंजरे में डाल दूँगा।” आर्यन डर से काँप रहा था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने देखा कि पिंजरे की कुंडी ढीली है। उसने पास पड़ा एक बड़ा पत्थर उठाया और पूरी ताकत से जग्गा की ओर फेंका। जग्गा अपना सिर बचाने के लिए पीछे हटा और इसी बीच आर्यन दौड़कर पिंजरे के पास पहुँचा।

उसने काँपते हाथों से पिंजरे का दरवाज़ा खोला। मिट्ठू तुरंत बाहर निकला और आर्यन के कंधे पर जा बैठा। जग्गा गुस्से में लाल-पीला होकर आर्यन की ओर झपटा, “तुमने मेरा शिकार भगा दिया, अब मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा!” जैसे ही जग्गा ने आर्यन का गला पकड़ने की कोशिश की, मिट्ठू ने ज़ोर से सीटी बजाई। अचानक जंगल से सैकड़ों तोते और पक्षी आ गए और जग्गा पर हमला कर दिया। जग्गा चिल्लाता हुआ वहाँ से भाग गया।

आर्यन और मिट्ठू सुरक्षित थे। मिट्ठू ने आर्यन के कान में कहा, “देखा आर्यन, आज तुमने बिना डरे अपनी आवाज़ उठाई। तुमने आज हकलाहट को नहीं, अपने साहस को बोलने दिया।” आर्यन की आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार वे खुशी के आँसू थे।

जब वे गाँव वापस लौटे, तो गाँव वालों ने उनका भव्य स्वागत किया। आर्यन अब पहले जैसा शर्मीला लड़का नहीं रहा था। उसका आत्मविश्वास बढ़ गया था। उसने गाँव के बच्चों को अपनी बहादुरी की कहानी सुनाई। आश्चर्य की बात यह थी कि अब वह बहुत कम हकलाता था। मिट्ठू ने उसे सिखाया था कि आत्मविश्वास ही सबसे बड़ी भाषा है।

गाँव के बच्चों ने भी आर्यन से माफ़ी माँगी और वे सब उसके दोस्त बन गए। मिट्ठू अब पिंजरे में नहीं रहता था, वह आज़ाद था, लेकिन वह हमेशा आर्यन के घर के पास वाले उसी पुराने बरगद के पेड़ पर रहता। शाम को दोनों साथ बैठते और ढलते सूरज को देखते हुए नई कहानियाँ बुनते। आर्यन समझ चुका था कि हर किसी की अपनी एक आवाज़ होती है, बस उसे पहचानने की ज़रूरत होती है। वह बोलने वाला तोता केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि आर्यन के सोए हुए साहस का प्रतिबिंब था। और इस तरह, एक छोटे से गाँव में एक नन्हे बालक और एक अद्भुत तोते की अटूट दोस्ती की मिसाल कायम हो गई।

Share This Article