डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम – पेपर बेचने वाले बच्चे से “मिसाइल मैन” बनने तक

Team Maunam
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गरीबी, संघर्ष और मेहनत से राष्ट्रपति बनने की कहानी

शुरुआत – एक साधारण घर, असाधारण सपना

15 अक्टूबर 1931…
तमिलनाडु के एक छोटे से द्वीप Rameswaram में एक बच्चे का जन्म हुआ।

नाम था – A. P. J. Abdul Kalam

घर बहुत साधारण था…
न तो बड़ी जमीन, न पैसा, न कोई आलीशान जीवन।

उनके पिता Jainulabdeen नाव चलाते थे – यात्रियों को एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाना उनका काम था।
माँ Ashiamma घर संभालती थीं और ज़रूरतमंदों को खाना खिलाती थीं।

👉 गरीबी थी… लेकिन संस्कार बहुत अमीर थे।


🧠 बचपन – सपनों की उड़ान शुरू

छोटे कलाम को आसमान बहुत पसंद था…
वो अक्सर समुद्र किनारे बैठकर उड़ते हुए पक्षियों को देखते रहते।

“क्या इंसान भी ऐसे उड़ सकता है?”
ये सवाल उनके मन में बार-बार आता।

स्कूल में वो बहुत तेज नहीं थे…
लेकिन एक चीज़ खास थी—

👉 सीखने की भूख।

उनके एक शिक्षक Sivasubramania Iyer ने एक दिन उन्हें पक्षियों की उड़ान समझाई।

उस दिन के बाद…
कलाम का सपना साफ हो गया—

👉 “मुझे उड़ान से जुड़ा कुछ करना है…”


📰 संघर्ष – जब बच्चा बना जिम्मेदार

घर की आर्थिक हालत कमजोर थी…
इसलिए छोटी उम्र में ही कलाम ने काम शुरू कर दिया।

सुबह 4 बजे उठना…
नमाज़ पढ़ना…
फिर अखबार बांटना…

हाँ, वही बच्चा जो बाद में भारत का राष्ट्रपति बना—
👉 वो कभी पेपर बेचता था।

रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेन से अखबार उठाना और पूरे शहर में बांटना…

लेकिन ये सिर्फ काम नहीं था—
👉 ये था जिम्मेदारी का पहला कदम।


🎓 शिक्षा – सपनों को दिशा मिली

स्कूल खत्म करने के बाद, उन्होंने St. Joseph’s College में दाखिला लिया।

वहाँ से उन्होंने Physics में graduation किया।
लेकिन दिल अभी भी उड़ान में ही था…

इसलिए उन्होंने आगे Madras Institute of Technology में Aeronautical Engineering पढ़ने का फैसला किया।

👉 यहाँ असली परीक्षा शुरू हुई।

एक बार उनका प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हुआ…
तो उनके प्रोफेसर ने सख्ती से कहा—

“अगर 3 दिन में पूरा नहीं किया, तो स्कॉलरशिप खत्म।”

कलाम ने दिन-रात मेहनत की…
सोना, खाना सब भूल गए…

👉 और 3 दिन में प्रोजेक्ट पूरा कर दिया।

उस दिन उन्होंने सीखा—

“Pressure आपको तोड़ता नहीं… बनाता है।”


✈️ पहला सपना टूटा – लेकिन हौसला नहीं

पढ़ाई पूरी होने के बाद, उनका सपना था—
👉 Indian Air Force में पायलट बनना।

उन्होंने परीक्षा दी…
सब कुछ सही हुआ…

लेकिन रिजल्ट आया—
👉 वो 9वें स्थान पर थे… और सिर्फ 8 सीट थीं।

सपना टूट गया।

कोई भी होता तो हार मान लेता…
लेकिन कलाम ने नहीं।

वो Rishikesh गए…
जहाँ उन्होंने संत Swami Sivananda से मुलाकात की।

स्वामी जी ने कहा—

👉 “जो हुआ, वो तुम्हारे लिए बेहतर है।
तुम्हें कुछ और बड़ा करना है।”

और यहीं से उनकी जिंदगी का असली मिशन शुरू हुआ।


🚀 करियर – भारत के लिए उड़ान

उन्होंने DRDO में काम शुरू किया।

शुरुआत आसान नहीं थी…
लेकिन वो सीखते रहे, आगे बढ़ते रहे।

बाद में वो ISRO से जुड़े।

👉 यहाँ उन्होंने भारत का पहला Satellite Launch Vehicle (SLV-3) बनाया।

और 1980 में…
भारत ने अपना पहला सैटेलाइट Rohini Satellite अंतरिक्ष में भेजा।

👉 ये भारत के इतिहास का बड़ा पल था।


💥 “मिसाइल मैन” बनने की कहानी

इसके बाद कलाम ने भारत के मिसाइल प्रोग्राम का नेतृत्व किया।

उन्होंने कई मिसाइलें विकसित कीं—

  • Agni Missile
  • Prithvi Missile

👉 इसी वजह से उन्हें कहा गया—

“Missile Man of India”


🇮🇳 परमाणु शक्ति – देश को नई पहचान

1998 में…
भारत ने Pokhran-II Nuclear Tests किए।

इस मिशन में भी कलाम की अहम भूमिका थी।

👉 भारत दुनिया के सामने एक परमाणु शक्ति बनकर उभरा।


👑 राष्ट्रपति – जनता का राष्ट्रपति

2002 में…
कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति बने—

👉 President of India

लेकिन वो बाकी राष्ट्रपतियों जैसे नहीं थे।

  • वो बच्चों से मिलते थे
  • छात्रों को प्रेरित करते थे
  • सरल जीवन जीते थे

👉 इसलिए उन्हें कहा गया—

“People’s President”


❤️ सादगी – सबसे बड़ी पहचान

इतनी बड़ी सफलता के बाद भी…

  • न कोई दौलत जमा की
  • न कोई अहंकार
  • न कोई दिखावा

उनकी सबसे बड़ी संपत्ति थी—

👉 ज्ञान और विनम्रता


📚 आखिरी पल – जब तक सांस, तब तक शिक्षा

27 जुलाई 2015…

कलाम Indian Institute of Management Shillong में छात्रों को लेक्चर दे रहे थे।

👉 “Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”

ये बोलते हुए…
वो अचानक गिर पड़े।

और वहीं…
उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

👉 एक शिक्षक की तरह जिए…
👉 और एक शिक्षक की तरह ही गए।


🌟 उनकी सोच – जो आज भी जिंदा है

डॉ. कलाम कहते थे—

“Dream is not that which you see while sleeping…
Dream is something that does not let you sleep.”

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