छोटा सा झूठ, बड़ा परिणाम

Team Maunam
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रवि ने बस मज़ाक में झूठ बोला था।
उसे नहीं पता था कि वही झूठ उसकी पूरी ज़िंदगी बदल देगा।

रवि स्कूल का सबसे होशियार लड़का नहीं था, लेकिन सबका पसंदीदा जरूर था। वह हँसमुख था, बातों-बातों में सबको हँसा देता था।

एक दिन क्लास में टीचर ने पूछा,
“कल का होमवर्क किसने नहीं किया?”

रवि ने होमवर्क नहीं किया था। डर के मारे उसने तुरंत कहा,
“मैम, मेरी कॉपी तो रास्ते में गिर गई।”

मैम ने भरोसा कर लिया।

“कोई बात नहीं रवि, कल ले आना।”

रवि ने राहत की साँस ली।
उसे लगा—बस, बच गया।

लेकिन पीछे बैठे मोहित ने सब सुन लिया था।

अगले दिन मोहित ने रवि से कहा,
“तूने झूठ बोला ना? अब मेरी बात मान, वरना मैम को बता दूँगा।”

रवि घबरा गया।

मोहित रोज़ उससे अपना काम करवाने लगा। कभी टिफिन मांगता, कभी नोट्स लिखवाता, कभी पैसे भी।

रवि परेशान हो गया, लेकिन सच बोलने की हिम्मत नहीं हुई।

एक दिन स्कूल में चोरी हो गई। किसी बच्चे का नया पेन गायब था। मोहित ने मौका देखकर कह दिया,
“मैम, मैंने रवि को उस डेस्क के पास देखा था।”

रवि की आँखें भर आईं।

“मैम, मैंने कुछ नहीं किया…”

लेकिन अब उसकी बात पर भरोसा करना मुश्किल था, क्योंकि मैम को बाद में पता चल चुका था कि कॉपी वाली बात झूठ थी।

उस दिन रवि बहुत रोया।

घर जाकर उसने सब सच बता दिया। अगले दिन वह स्कूल गया और पूरी क्लास के सामने बोला,
“मैंने होमवर्क के लिए झूठ बोला था। उसी गलती की वजह से आज मुझ पर चोरी का शक हुआ। मैं चोर नहीं हूँ, लेकिन झूठा जरूर बन गया था।”

क्लास में सन्नाटा छा गया।

मोहित भी शर्मिंदा हो गया और उसने सच बता दिया कि चोरी रवि ने नहीं की थी।

मैम ने रवि से कहा,
“गलती सबसे होती है, लेकिन सच बोलने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है।”

उस दिन रवि ने सीख लिया—

एक छोटा सा झूठ उस समय तो बचा सकता है,
लेकिन आगे चलकर बहुत बड़ा नुकसान कर सकता है।

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