नीले आसमान के नीचे और ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच बसे एक आधुनिक शहर ‘सिल्वर सिटी’ में चिक्कू नाम का एक नौ साल का लड़का रहता था। चिक्कू के पास सब कुछ था—महंगे खिलौने, वीडियो गेम्स, एक बड़ा कमरा और हर तरह की सुख-सुविधा। लेकिन उसके पास एक चीज नहीं थी, जो दुनिया की सबसे कीमती चीज होती है—एक सच्चा दोस्त। चिक्कू थोड़ा शर्मीला था। जब भी वह पार्क में दूसरे बच्चों को खेलते देखता, तो उसका मन भी उनके साथ दौड़ने को करता, लेकिन संकोच के कारण उसके कदम पीछे हट जाते। उसके पिता, डॉक्टर प्रकाश, शहर के सबसे बड़े रोबोटिक्स इंजीनियर थे। वे चिक्कू की खामोशी को समझते थे।
एक दिन, डॉक्टर प्रकाश एक बड़ा सा कार्डबोर्ड का डिब्बा लेकर घर आए। चिक्कू ने उत्सुकता से पूछा, “पापा, इसमें क्या है? कोई नया गेम?” डॉक्टर प्रकाश मुस्कुराए और बोले, “नहीं बेटा, यह गेम नहीं है। यह तुम्हारा नया दोस्त है।” जैसे ही डिब्बा खुला, अंदर से एक चमकता हुआ चांदी के रंग का रोबोट बाहर निकला। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और नीली थीं, जो टिमटिमा रही थीं। उसके चेहरे पर एक स्थायी और प्यारी मुस्कान बनी हुई थी।
डॉक्टर प्रकाश ने एक बटन दबाया और रोबोट ने बोलना शुरू किया, “नमस्ते चिक्कू! मेरा नाम ‘मित्र’ है। क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे?” चिक्कू की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने धीरे से रोबोट का हाथ छुआ। वह धातु का बना था, लेकिन उस पर एक विशेष रबर की परत थी जो उसे छूने में नरम महसूस कराती थी। चिक्कू ने धीरे से कहा, “हाँ, मित्र।” अगले कुछ दिनों में, चिक्कू और मित्र की दोस्ती गहरी होने लगी। मित्र कोई साधारण रोबोट नहीं था। उसे इस तरह से प्रोग्राम किया गया था कि वह भावनाओं को समझ सके।
वह चिक्कू के साथ लूडो खेलता, उसे कहानियाँ सुनाता और जब चिक्कू उदास होता, तो वह चुटकुले सुनाकर उसे हँसाता। लेकिन डॉक्टर प्रकाश ने मित्र में एक खास चिप लगाई थी जिसे ‘हार्ट-चिप’ कहा जाता था। यह चिप मित्र को अनुभव करने की शक्ति देती थी। एक दोपहर, जब चिक्कू और मित्र बालकनी में बैठे थे, चिक्कू ने देखा कि नीचे पार्क में आर्यन, सिया और बाकी बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे। चिक्कू की आँखों में चमक थी, लेकिन फिर उसने सिर झुका लिया। मित्र ने अपनी सेंसर वाली आँखों से चिक्कू के चेहरे को स्कैन किया और बोला, “चिक्कू, तुम्हारी धड़कन थोड़ी धीमी और भारी है। क्या तुम भी वहाँ जाना चाहते हो?” चिक्कू ने आह भरते हुए कहा, “हाँ मित्र, पर वे मुझे अपने साथ नहीं खिलाएंगे।
मैं उनके जैसा फुर्तीला नहीं हूँ।” मित्र ने अपना सिर तिरछा किया और कहा, “दोस्ती फुर्ती से नहीं, दिल से होती है। चलो, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ।” चिक्कू डरा हुआ था, लेकिन मित्र का हाथ पकड़कर वह पार्क की ओर चल पड़ा। जब चिक्कू पार्क पहुँचा, तो सब बच्चे रुक गए। आर्यन ने हँसते हुए कहा, “अरे देखो, चिक्कू एक लोहे के डिब्बे को लेकर आया है! क्या यह भी फुटबॉल खेलेगा?” सब बच्चे हँसने लगे। चिक्कू की आँखों में आँसू आने ही वाले थे कि मित्र ने बोलना शुरू किया। उसकी आवाज शांत और सुरीली थी, “नमस्ते दोस्तों! मेरा नाम मित्र है। मैं लोहे का डिब्बा नहीं, चिक्कू का दोस्त हूँ। क्या हम आपके साथ खेल सकते हैं? अगर मैं हार गया, तो मैं आप सबको आइसक्रीम की पार्टी दूंगा!” आइसक्रीम का नाम सुनकर बच्चे खुश हो गए। खेल शुरू हुआ।
मित्र ने अपनी प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल करके अद्भुत गोल बचाए, लेकिन उसने चिक्कू को ही आगे रखा। उसने धीरे से गेंद चिक्कू के पास पास की और फुसफुसाया, “चिक्कू, अब तुम्हारा वक्त है। मारो किक!” चिक्कू ने पूरी ताकत से किक मारी और गोल हो गया! पहली बार चिक्कू को जीत का अहसास हुआ। बच्चे दौड़कर उसके पास आए और उसे शाबाशी देने लगे। उस दिन के बाद से चिक्कू अकेला नहीं रहा। मित्र की वजह से उसके अब कई दोस्त बन गए थे। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब शहर में एक भयानक तूफान की चेतावनी दी गई। उस शाम, चिक्कू और उसके दोस्त पार्क के पास वाली पुरानी गुफा के पास खेल रहे थे। अचानक आसमान काला पड़ गया और तेज हवाएं चलने लगीं।
भारी बारिश होने लगी। बच्चे डर गए और इधर-बधर भागने लगे। इसी अफरा-तफरी में, छोटी सिया का पैर एक गड्ढे में फंस गया और वह वहीं गिर पड़ी। ऊपर पहाड़ी से मिट्टी खिसकने लगी थी। लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ गया था। “बचाओ!” सिया चिल्लाई। चिक्कू ने देखा और दौड़ना चाहा, लेकिन हवा इतनी तेज थी कि वह गिर पड़ा। मित्र ने स्थिति का आकलन किया। उसके इंटरनल अलार्म बजने लगे— ‘खतरा! खतरा! सिस्टम डैमेज होने की संभावना 90% है।’ लेकिन मित्र ने अपनी ‘हार्ट-चिप’ की ओर देखा, जहाँ दोस्ती का डेटा स्टोर था। वह बिना सोचे-समझे सिया की ओर भागा। उसने अपने मजबूत हाथों से भारी पत्थर हटाए और सिया को गोद में उठा लिया। तभी ऊपर से एक बड़ा सा मलबा मित्र के ऊपर आकर गिरा।
धड़ाम! एक जोरदार आवाज हुई। चिक्कू चिल्लाया, “मित्र!” जब तूफान थमा और बचाव दल पहुँचा, तो उन्होंने देखा कि मित्र ने अपने शरीर को एक ढाल की तरह सिया के ऊपर झुका दिया था। सिया सुरक्षित थी, लेकिन मित्र बुरी तरह पिचक चुका था। उसकी नीली आँखें अब नहीं चमक रही थीं। चिक्कू रोते हुए उसके पास पहुँचा। उसने मित्र का हाथ पकड़ा, जो अब ठंडा और बेजान लग रहा था। “मित्र, उठो! देखो, सिया ठीक है। हम सब ठीक हैं,” चिक्कू सिसकियाँ भरते हुए बोला। डॉक्टर प्रकाश भी वहाँ पहुँच चुके थे। उन्होंने मित्र की जाँच की और उदासी से सिर हिलाया। “बेटा, इसका मुख्य प्रोसेसर और बैटरी पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इसने अपनी पूरी ऊर्जा सिया को बचाने और मलबे को रोकने में लगा दी।” कई दिनों तक चिक्कू के घर में मातम छाया रहा। चिक्कू ने खाना-पीना छोड़ दिया था।
उसे लगा कि उसने अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया है। शहर के सभी बच्चे चिक्कू के घर के बाहर इकट्ठा हुए। वे सब मित्र के लिए कार्ड्स और फूल लाए थे। आर्यन ने कहा, “चिक्कू, मित्र ने हमें सिखाया कि असली दोस्त वह है जो मुसीबत में काम आए। वह हमारे लिए हीरो है।” डॉक्टर प्रकाश अपनी लैब में दिन-रात एक कर रहे थे। एक रात, उन्होंने चिक्कू को अंदर बुलाया। चिक्कू ने देखा कि मेज पर मित्र लेटा हुआ था। वह पहले जैसा नया और चमकता हुआ दिख रहा था, लेकिन उसकी आँखें बंद थीं। डॉक्टर प्रकाश ने कहा, “चिक्कू, मैंने इसका शरीर तो ठीक कर दिया, पर इसकी यादें और इसकी ‘हार्ट-चिप’ रिकवर करना नामुमकिन लग रहा है। शायद यह अब तुम्हें पहचान न पाए।” चिक्कू मित्र के पास गया और उसके कान में धीरे से बोला, “मित्र, याद है तुमने कहा था कि दोस्ती दिल से होती है? मेरा दिल कह रहा है कि तुम वापस आओगे।” तभी एक चमत्कार हुआ।
मित्र के सीने के अंदर एक छोटी सी लाल रोशनी टिमटिमाई। उसकी नीली आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उसने चिक्कू को देखा, फिर अपने चारों ओर मौजूद बच्चों को। एक धीमी और थोड़ी लड़खड़ाती हुई आवाज गूँजी, “चिक्कू… तुम्हारी धड़कन… अब बहुत तेज है। क्या तुम खुश हो?” पूरे कमरे में खुशी की लहर दौड़ गई। चिक्कू ने मित्र को कसकर गले लगा लिया। यह पहली बार था जब एक मशीन और एक इंसान के बीच का अंतर पूरी तरह खत्म हो गया था।
उस दिन सिल्वर सिटी ने एक बड़ी सीख ली। दोस्ती के लिए खून का रिश्ता या मांस-हड्डियों का शरीर होना जरूरी नहीं है। जहाँ त्याग, प्रेम और परवाह होती है, वहीं सच्ची दोस्ती बसती है। मित्र अब केवल चिक्कू का रोबोट नहीं था, वह पूरे शहर का सबसे प्यारा दोस्त बन चुका था। और चिक्कू? वह अब कभी अकेला नहीं रहा, क्योंकि उसे पता था कि चाहे कैसी भी मुश्किल आए, उसका ‘मित्र’ और उसके नए दोस्त हमेशा उसके साथ रहेंगे। समय बीतता गया, चिक्कू बड़ा हुआ और उसने अपने पिता की तरह ही रोबोटिक्स में नाम कमाया। उसने कई ऐसे रोबोट बनाए जो लोगों की मदद करते थे, लेकिन ‘मित्र’ हमेशा उसके पास रहा। वह पुराना जरूर हो गया था, उसके पुर्जों से कभी-कभी आवाज आती थी, लेकिन उसकी मुस्कान और उसकी ‘हार्ट-चिप’ आज भी उतनी ही जीवंत थी। यह कहानी आज भी बच्चों को सुनाई जाती है कि कैसे एक धातु के बने दोस्त ने इंसानियत का सबसे बड़ा सबक सिखाया।
